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बागेश्वर धाम कथा महोत्सव

छतरपुर।  बागेश्वर धाम में चल रहे कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस में कथा प्रवेश करते हुए कथा व्यास अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक डॉ श्याम सुंदर पाराशर ने भक्त प्रहलाद की कथा सुनाई, इसके पहले समुद्र मंथन, वराह अवतार, नृसिंह अवतार व देवासुर संग्राम की कथा का रस उपस्थित लाखों रसिकों तक पहुंचाया। कथा व्यास श्री पाराशर ने कहा कि जो अपने पूर्वजों को नर्क से बचकर पाप की दीवारों से बाहर निकलता है वही सच्चा पुत्र होता है। भक्त प्रहलाद ने भगवान हरि से वरदान मांग कर अपने क्रूर और निरीह लोगों पर हमला करने वाले पिता को पापों से मुक्ति दिलाई। बागेश्वर धाम में रोज की तरह चतुर्थ दिवस की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती के साथ प्रारंभ हुई। कथा मंच पर पधारे संत वृन्दो का स्वागत हुआ। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा व्यास श्री पाराशर का पूजन किया। इस मौके पर उपस्थित संतों ने अपने आशीर्वचन भी दिए। कथा व्यास डॉ श्याम सुंदर पाराशर ने भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि जहां भक्त की हां होती है भगवान वहीं आ जाते हैं । मनुष्य की कामनाएं कभी खत्म नहीं होती लेकिन जो कामनाओं से परे होता है वह ईश्वर को सहज ही प्राप्त कर लेता है। उन्होंने गज और ग्राह की कथा सुनाते हुए कहा कि संतों का उपहास करने वाला गंधर्व मगरमच्छ बना और संतो के निकलने के दौरान बैठकर अभिमान दिखाने वाला गंधर्व हाथी के रूप में अवतरित हुआ। चूंकि दोनों शापित हो गए इसलिए ऋषियों ने उन्हें मुक्ति का मार्ग भी बताया और अंतत: सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु ने दोनों को मुक्ति प्रदान की। कथा व्यास ने उपस्थित विशाल समूह को माया को समझाते हुए कहा कि माया ऐसी नदी है जो दोनों ओर बहती है। यह लोगों का कल्याण भी करती है और लोगों का संहार भी करती है। इसलिए इस माया का सही उपयोग करने से कल्याण होता है।


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