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दुनिया में पाकीजा बस मां का आंचल होता है, रात भर चला यादे कैफ व यादे राहत इंदौरी मुशायरा

छतरपुर। कौमी एकता का 29वां यादे कैफ व यादे राहत इंदौरी ऑल इंडिया मुशायरा शहर के महल मैदान में आयोजित हुआ जिसमें हिन्दुस्तान के मशहूर शायरों ने शिरकत कर मौजूद लोगों को अपनी शायरी सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। शायरी का यह प्रोग्राम पूरी रात चला जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। 


आल इंडिया मुशायरे का आगाज करते हुए सबसे पहले फीता काटकर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इसके बाद शायर अहमद अयान ने अपनी शायरी पेश करते हुए कहा कि जब दिल पागल हो जाता है, इश्क मुकम्मल होता है, गंगाजल से भी पावन आंखों का जल होता है। जिसे सुनकर उपस्थित लोगों ने जमकर तालियां बजाईं। उन्होंने कहा कि दुनिया में पाकीजा बस मां का आंचल होता है जिसकी जमकर तारीफ हुई। शकीफ हाशमी ने अपनी शायरी पेश करते हुए पढ़ा निकालो आंख से आंसू, ऐ अय्यारी जरूरी, सियासत में थोड़ी अय्यारी जरूरी। शायर प्रतिभा यादव बलिया ने बफा खुलूस के परचम को उठाते रहना, अभी तो भीड़ है नफरत के कारखाने में।

 मायल पादवी ने पढ़ा खुले दिल से मिलेंगे तो बहाली होगी, एकता जमाने में अपनी मिसाली होगी, जात और पात के झगड़ों से निकले जो, ईद होगी हर रोज दीवाली होगी। जहाज देवबंदी ने पढ़ा अगर में हाथ आ जाता तो नानी याद आ जाती, गंगा का जल नसीब हो न, जमजम नसीब हो, जो भी हो बहुत कम नसीब हो, हिन्दू-मुस्लिम करके लड़ रहे हैं जो लोग,  उन्हें जहन्नम नसीब हो। शायर ताहिर फराज, जौहर कानपुरी, शबीना अदीब, अज्म शाकरी, इस्माईल नजर, सरवर कमाल ने भी अपनी शायरी पेश कर शमा बांधा जिसे सुनकर लोगों ने खूब वाहवाही की।  मुशायरा आयोजक एवं संयोजक फारूक अली, सदर मोहम्मद आसिफ राईन, अब्बास भाई, वकील अहमद, चौबे चौधरी, अनीस खान सहित मुशायरा कमेटी के सदस्यों सहित आम जनता मौजूद रही।


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