टीकमगढ़ । नगर सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 316वीं कवि गोष्ठी ‘आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़’ में ‘नवरात्रि’ पर केन्द्रित आयोजित की गयी है। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ व्यंग्यकार अजीत श्रीवास्तव ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में कहानीकार डाॅ. एन.एम. अवस्थी एवं विषिष्ट अतिथि के रूप में बुजुर्ग शायर जफ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ व शिक्षाविद् शीलचन्द्र जैन साहब रहे।
गोष्ठी की शुरूआत गीतकार वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती बंदना कर यह रचना सुनायी -
बड़ी दूरी से आये मंदिर मैया पूरी करो आश मेरी।।
प्रमोद मिश्रा (बल्देवगढ़) ने रचना सुनायी-रोका नहीं था खेला, जब बेटा के आग से।
जलने लगे है घर, सुनो घर के चिराग से।।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने दोहे कहे-माता की झाँकी सजी,‘राना’ अब चहुँ ओर।
माता की आराधना, करत आज भइ भोर।।
गोविन्द्र सिंह गिदवाहा(मडावरा,उ.प्र.)ने रचना पढ़ी-नवरात्रि में नौ दिन,खुशी खुशी गुज़र जाते है।
माँ की भक्ति में भक्तों के दिन भी सँवर जाते है।।
यदुकुल नंदन खरे (बल्देवगढ़) ने सुनाया- मजबूर होकर आदमी धृतराष्ट्र बन जाता है।
एस.आर सरल ने पढ़ा- मैया सेवक ठाँडे द्ववारे,लंबी लगीं कतारें।
हात जोर वितनी कर कै रय, दे वी तुमरें सहारे।।
विक्रम सिंह लोधी ने रचना पढ़ी- मैं आज का युवा हूँ। खोखला,बदरंग, बदसूरत हूँ।।
रविन्द्र यादव ने कविता पढ़ी- तुम्हें चाहिए हो तब तो नहीं मिल सकता।
ऐसी दुनिया है यहाँ सब तो नहीं मिल सकता।।
शकील खान ने ग़ज़ल कही- सबका दुःख हर लिया है माता ने। जो भी माँगा दिया है माता ने।।
अनवर खान ‘साहिल’ ने ग़ज़ल कही- सबसे शीतल माँ का आँचल,बेहद निर्मल काँ का आँचल।।
यमुना चंबल माँ का आँचल, गंगा का जल माँ का आँचल।।
कमलेश सेन ने रचना पढ़ी - कभी गीतो कभी ग़ज़लों का मैं विस्तार लिख दूँगा।
तू जो मुझको चाहेगी तुझे ये प्यार लिख दूँगा।।
विशाल कड़ा ने रचना पढ़ी- माता सांची बताओ, खोल दओ काय जो कृपा को दुवाओ।।
इनके आलावा हाजी ज़फ़र, एन.एम अवस्थी, शीलचन्द्र जैन,डी.पी.यादव एवं संदीप यादव ने अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन रविन्द्र यादव ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन अध्यक्ष व संयोजन-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया।

