टीकमगढ़। युवा वैज्ञानिक और एयरो एक्स स्पेस टेक्नोलोजी के संस्थापक प्रखर विश्वकर्मा ने बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में इसरो , रोस्कॉसमॉस और प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स के साथ चर्चा की एवं आपस में कुछ प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने को लेकर सहमति हुई । प्रखर की सबसे पहले भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट स्पेस एजेंसी स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ चर्चा हुई और आपस में कुछ मिशन को लेकर बातचीत हुई । इसके साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस ने प्रखर को कोलैबोरेशन करने के लिए और साथ काम करने के लिए एक पत्र दिया । प्रखर ने इस एग्जीबिशन में इसरो के आगामी मिशनों का अवलोकन किया और जानकारी ली । इससे पहले प्रखर ने कोलकाता में स्क्रीनटेक्स इंडिया कार्यक्रम में हिस्सा लिया था जिसमें उन्होंने स्क्रीन प्रिंटिंग से संबंधित कार्यशैली की कंपनियों के साथ बातचीत की । प्रखर विश्वकर्मा कुछ दिन पहले ही वैमनिकी शिखर सम्मेलन में दिल्ली के एयरोसिटी में शामिल हुए थे जहां दुबई की कई विमानन कंपनियों ने उनसे चर्चा की और उनको कुछ तौहफे भी दिए। प्रखर विश्वकर्मा पिछले 6 वर्षों से खगोल विज्ञान और रक्षा के क्षेत्र में बच्चों को प्रशिक्षण दे रहें हैं। पूरे प्रदेश और विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बहुत गर्व की बात है कि प्रखर को इसरो, नासा और कई अन्य संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। प्रखर रोजाना 700 से 800 लोगों को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में ट्यूशन देते हैं । वे वर्तमान में अपनी रिलॉन्च ऑटोमैटिक मिसाइल यानी प्रोजेक्ट “राम” पर कार्य कर रहे हैं ।
प्रखर विश्वकर्मा ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बेंगलुरु और कोलकाता में लहराया परचम
October 22, 2024
टीकमगढ़। युवा वैज्ञानिक और एयरो एक्स स्पेस टेक्नोलोजी के संस्थापक प्रखर विश्वकर्मा ने बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में इसरो , रोस्कॉसमॉस और प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स के साथ चर्चा की एवं आपस में कुछ प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने को लेकर सहमति हुई । प्रखर की सबसे पहले भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट स्पेस एजेंसी स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ चर्चा हुई और आपस में कुछ मिशन को लेकर बातचीत हुई । इसके साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस ने प्रखर को कोलैबोरेशन करने के लिए और साथ काम करने के लिए एक पत्र दिया । प्रखर ने इस एग्जीबिशन में इसरो के आगामी मिशनों का अवलोकन किया और जानकारी ली । इससे पहले प्रखर ने कोलकाता में स्क्रीनटेक्स इंडिया कार्यक्रम में हिस्सा लिया था जिसमें उन्होंने स्क्रीन प्रिंटिंग से संबंधित कार्यशैली की कंपनियों के साथ बातचीत की । प्रखर विश्वकर्मा कुछ दिन पहले ही वैमनिकी शिखर सम्मेलन में दिल्ली के एयरोसिटी में शामिल हुए थे जहां दुबई की कई विमानन कंपनियों ने उनसे चर्चा की और उनको कुछ तौहफे भी दिए। प्रखर विश्वकर्मा पिछले 6 वर्षों से खगोल विज्ञान और रक्षा के क्षेत्र में बच्चों को प्रशिक्षण दे रहें हैं। पूरे प्रदेश और विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बहुत गर्व की बात है कि प्रखर को इसरो, नासा और कई अन्य संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। प्रखर रोजाना 700 से 800 लोगों को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में ट्यूशन देते हैं । वे वर्तमान में अपनी रिलॉन्च ऑटोमैटिक मिसाइल यानी प्रोजेक्ट “राम” पर कार्य कर रहे हैं ।
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