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ओशो की मृत्यु की अनसुलझा गुत्थी सुलझाने के लिए पीएम को लिखा पत्र

 



0 ओशो के 34वें परिनिर्वाण पर गोरखगिरि पर्वत में श्रद्धांजलि सभा का हुआ आयोजन
शुभ न्यूज महोबा। शताब्दी के महान क्रांतिकारी संत ओशो के 34वें परिनिर्वाण दिवस पर रविवार को ओशो प्रेमियों ने गोरखगिरि पर्वत के ऊपर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर हास्य व सक्रिय ध्यान कर ओशो को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये साथ ही ओशो की मृत्यु की अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा।
ओशो के अनुयायी स्वामी अंतर्यात्री ने कहा कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात क्या होगी कि 34 साल बीत जाने के बाद भी ओशो की विवादास्पद मृत्यु का रहस्य नहीं सुलझा, जिस आध्यात्मिक गुरू ने ध्यान की 113 विधियां खोजकर पूरे पश्चिम जगत को हिला दिया और उसकी मृत्यु पर आज भी देश की सरकारें खामोश हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हमें उम्मीद है कि वे जरूर ओशो की मृत्यु पर छाये रहस्य के पर्दे को उठाने के लिए निष्पक्ष जांच करवाएंगे। उन्होंने बताया कि ओशो के शिष्य शुरू से मांग उठा रहे हैं लेकिन महाराष्ट्र की सरकारों ने अब तक ओशो की मृत्यु की जांच के लिए कमेटी तक नहीं बनायी। इससे ओशो के करोड़ों अनुयायी आहत है। कहीं ऐसा न हो नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तरह ओशो की मृत्यु पर पड़ा पर्दा षडयंत्र की भेंट चढ़ जाए। पुणे आश्रम में जब ओशो की मृत्यु हुई, उस वक्त न तो उनके निजी चिकित्सक गोकुल गोकर्ण को अंदर जाने दिया गया और न उनकी मां को।
 उन्होंने बताया कि डा0 गोकुल ने कहा था कि आश्रम प्रबंधन ने मृत्यु प्रमाण पत्र पर उनसे जबरन हस्ताक्षर कराये। अपनी पुस्तक हू किल्ड ओशो में पत्रकार अभय वैद्य ने भी तमाम सवाल उठाये। ओशो के शिष्य योगेश ठक्कर ने मुंबई हाईकोर्ट में ओशो की वसीयत विवाद पर जनहित याचिका दायर की लेकिन अब तक हुआ कुछ नहीं। कहा कि ईसाइयत के पाखंड पर हमला करने के कारण तिलमिलाई अमेरिकी सरकार ने जेल में धीमा जहर थैलीसियम देकर ओशो को मारने का षडयंत्र रचा या फिर उनके लोभी विदेशी शिष्यों ने हजारों करोड़ की उनकी विरासत को हड़पने के लिए उनको 59 वर्ष की आयु में मार दिया। क्या इन यक्ष प्रश्नों का जवाब दुनिया को नहीं मिलना चाहिए। श्रद्धांजलि सभा में महंत रामदास त्यागी, अमित, रवि पुरवार, अवधेश गुप्ता, गया प्रसाद कोस्टा, डा, देवेन्द्र पुरवार,  प्रेम, प्रवीण चौरसिया, सिद्ध गोपाल सेन, संजू बाबा, महेन्द्र सोनी व ललित समेत तमाम लोग मौजूद रहे।


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