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दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय.......... 0 कबीर आश्रम में संत कबीर अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम संपन्न



शुभ न्यूज महोबा। शहर के संत कबीर आश्रम में रविवार की सुबह संत कबीर अमृतवाणी सत्संग का समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। सत्संग कार्यक्रम की शुरूआत कबीर वंदना जय कबीर जय कबीर जय गुरू कबीरा से की गई। इसके बाद संगीतमय भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। संगीत श्क्षिक त्रिलोक ने सुख के सब साथी दुख में न कोय मेरे राम, मेरे राम.. तेरा नाम एक साँचा,दूजा ना कोई भजन सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी ने कबीर का दोहा दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय सुनाते हुए कहा कि दुःख के समय सभी भगवान को याद करते हैं पर सुख में कोई नहीं करता। यदि सुख में भी भगवान को याद किया जाए तो दुःख हो ही क्यों। कहा कि सच्ची भक्ति में ईश्वर से अनन्य प्रेम होता है। कितना भी दान पुण्य, जप तप करो अगर मनुष्य के अंदर ईश्वर के प्रति प्रेम और विश्वास नहीं है तो सब बेकार है। सत्यंग में संगम सिंह चंदेल ने सध ले लो मेरी घनश्याम भजन की प्रस्तुति दी तो वहीं रामदीन अनुरागी न बिन कैसे टरहै अंधी जा दुनिया कबीरी भजन सुनाया।
बांसुरी वादक जगदीश रिछारिया पायो जी मैने राम रतन धन पायो तो वहीं लक्ष्मी यादव ने कन्या के तुम पांच पूजकै अपनो जनम सुधारो भजन से लोगों को कन्या का महत्व समझाया। हरिश्चंद्र वर्मा हरीश ने स्वरचित कविता तीरथ से भी बढ़कर हमाओ महोबा यार है सुनाई। कामतानाथ चारसिया ने उठ जाग मुसाफिर भोर हुई, अब रैन कहां जो सोवत है भजन प्रस्तुत किया। सुनीता शास्त्री ने एक श्लोकीय रामयण सुनाकर राम के आदर्श चरित्र का वर्णन किया। सुखराम स्नेही ने मन फूला फूला फिरै जगत में कैसा नाता रे की प्रस्तुति देकर लोगों की खूब तालियां बटोरी। इस मौके पर प्रोफेसर प्रदीप सिंह, सीताराम पुरवार, प0 हरीशंकर नायक, करताल वादक कमलापत, लखनलाल, संगम सिंह चंदेल, ढोलक वादक तेजप्रताप, भुमानीदीन, पप्पू सैन आदि मौजूद रहे।


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