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चौदह वर्ष के वनवास दौरान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण आए थे गोरखगिरि



0 ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई गोरखगिरि परिक्रमा
शुभ न्यूज महोबा। गुरू गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर शहर के एतिहासिक गोरखगिरि पर्वत की श्रद्धालुओं ने परिक्रमा लगाई। परिक्रमा समाप्ति के बाद शिव मंदिर में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने गोरखगिरि पर्वत के महत्व के अलावा गोरखगिरि की परिक्रमा लगाने से कामदगिरि चित्रकूट की तरह मिलने वाले फल पर भी प्रकाश डाला।
ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर बुधवार को श्रद्धालु शिव मंदिर में एकत्रित हुए प्रातः छह बजे गोरखगिरि परिक्रमा आरम्भ करते हुए पठवा के बाल हनुमान मंदिर, महावीरन, कबीर आश्रम, हाजी फिरोजशाह बाबा, सकरे सन्या, भूतनाथ, काली माता, राधा कृष्ण, छोटी चंडिका मंदिर होते हुए पुलिस लाइन पहुंची, उसके बाद नागौरिया, बालाजी हनुमान, सुनरा सुनरिया, काल भैरव मंदिर होते हुए पुनः शिवतांडव मंदिर परिसर में समाप्त हुई। परिक्रमा दौरान भक्तगण हाथों में भगवा व पीले ध्वज लेकर जय श्रीराम, गुरू गोरखनाथ के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे साथ ही परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले ऐतिहासिक मंदिरों में माथा टेेंक कर देश में अमन चैन और तरक्की की प्रार्थना कर रहे थे।
परिक्रमा समाप्ति के बाद आयोजित गोष्ठी में समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी ने कहा कि गोरखगिरि पर्वत औषधि का भंडरा है क्योंकि यहां पर बरसात के समय तमाम प्रकार की जड़ी बूटियां मिलती है। कहा कि चौदह वर्ष के वनवास काल में भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण के गोरखगिरि में उनके चरण पड़ने से यह पर्वत चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत की तरह चारो फल धर्म अर्थ काम व मोक्ष प्रदान करने वाला हो गया है। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 14 के श्लोक संख्या 17 की व्याख्या करते हुए कहा कि सतोगुण से ज्ञान प्राप्त होता है, रजोगुण से लोभ व तमोगुण से मोह पैदा होता है। सतोगुणी उच्च लोक में जाते हैं, रजोगुणी पृथ्वी लोक में ही रह जाते हैं तथा तमोगुणी नरक लोक में रह जाते हैं। समाजसेवी शिकुमार गोस्वामी ने परिक्रमा मार्ग के धार्मिक स्थलों के इतिहास से परिचय कराया। इस मौके पर अधिवक्ता सुनीता अनुरागी, पं0 हरीशंकर नायक, गौरीशंकर कोष्ठा, बैजनाथ, ओमप्रकाश साहू, परशुराम, पप्पू सैन, चंद्रभान श्रीवास, मुन्नालाल, राकेश चौरसिया सहित तमाम माताएं बहने मौजूद रहीं।


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