शुभ न्यूज महोबा। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में गुरू तेग बहादुर बलिदान दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में प्रधानाचार्य व आचार्यों ने गुरु तेग बहादुर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए सर्वोच्च बलिदान को याद किया। गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कालेज के प्रधानाचार्य कमेलश सिंह ने कहा कि अमृतसर में 01 अप्रैल 1621 को जन्मे गुरु तेग बहादुर का बचपन का नाम त्यागमल था। मात्र 14 वर्ष की आयु में ही उन्होंने मुगलों के हमले के विरुद्ध वीरता का परिचय दिया, जिसके बाद उनके पिता गुरु हरगोबिंद साहिब ने उन्हें ‘तेग बहादुर’ (तलवार का धनी) नाम दिया।
उन्होंने बताया कि धर्म और मानवता की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी ने 11 नवंबर 1675 को अपने प्राणों की आहुति दी, जिसे मानव इतिहास में मानवाधिकारों के लिए दी गई सबसे महान शहादत माना जाता है, इसी कारण से उन्हें धर्म दी चादर कहा जाता है। आचार्य पंडित जगप्रसाद तिवारी ने विद्यार्थियों को गुरु तेग बहादुर के जीवन परिचय से अवगत कराया। उन्होंने एक लघुकथा के माध्यम से गुरु तेग बहादुर के महत्व और उनके त्याग को समझाया। छात्र रोनित ने विद्यार्थियों को गुरु तेग बहादुर के बलिदान स्थल पर स्थित शीशगंज गुरुद्वारा के विषय में भी जानकारी दी।
इस अवसर पर आचार्य जयनारायण तिवारी, राजेश पुष्पक, गिरीश सक्सेना, रविन्द्र चौरसिया, आदित्य मिश्र, सुनील द्विवेदी, सुधाकर अवस्थी, प्रीति सिंह, तान्या, कृतिका, हिमांशु, अरुण, गौरव, जगदीश, देवेंद्र, बलवंत, सुधांशु सौरभ, मनोज, आदि शिक्षक सहित समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे ।
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में तेग बहादुर के बलिदान दिवस पर आयोजित की गई गोष्ठी
November 24, 2025
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