ड्राइवरों का आरोप: मजदूरों के लिए प्राणघातक है नया मोटर व्हीकल एक्ट
छतरपुर। नए साल के पहले ही दिन टैक्सी और बस चालकों की हड़ताल से रफ्तार थम गई। वाहनों के न चलने और ड्राइवरों द्वारा चक्का जाम किए जाने के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई बीमार व्यक्ति इस हड़ताल का शिकार हो गए। ड्राइवरों का कहना है कि नया मोटर व्हीकल एक्ट उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है। परिवहन कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष प्रखर भट्ट ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जो नया प्रावधान किया गया है उसके खिलाफ ड्राइवरों में आक्रोश है। यदि ड्राइवर के पास पैसे होते तो वह 300 रूपए की मजदूरी न करते हुए भी कहीं दुकान खोलकर बैठ जाते। एक ड्राइवर रमेश रैकवार ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पूरी सावधानी के साथ वाहन चलाने के बावजूद कई बार हादसा हो जाता है। हादसे में गलती बड़े वाहन की ही तय की जाती है ऐसी स्थिति में यदि कोई घटना हो गई तो वे 7 लाख रुपए का जुर्माना कहां से दे सकेंगे तथा 10 साल की सजा तय होते ही उनका परिवार भूखे मरने की स्थिति में पहुंच जाएगा। ड्राइवरों का कहना है कि जब तक इस कानून को वापस नहीं लिया जाता तब तक वह अपनी हड़ताल जारी रखेंगे। उधर ड्राइवरों की हड़ताल एवं चक्का जाम किए जाने के कारण लोगों को खासी समस्याओं से जूझना पड़ा। अपना इलाज कराने जिला अस्पताल जाने वाले लोग कई घंटे जाम में फंसे रहे। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर चक्का जाम करने वाले लोगों को समझाइस दी तब कहीं जाकर रास्ता खुल सका। वहीं पेट्रोल पंपों पर भी लोगों की खासी भीड़ देखी गई। लोगों ने हड़ताल के कारण पेट्रोल की कमी चलते आज अपने वाहनों में अतिरिक्त डीजल-पेट्रोल भी डलवाया।


