ईशानगर। ईशानगर में चल रही श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं अष्टोत्तरसत साप्ताहिक श्रीमद् भागवत महापुराण की पावन कथा के द्वितीय दिवस में सनातन की ध्वजा जन-जन तक पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित शिवाकान्त महाराज ने सती चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव की बात न मानकर देवी सती अनाहुत बिना बुलाए अपने पिता दक्ष के यहां गई और अंत में उन्हें प्राणों की आहुति देनी पड़ी जबकि स्त्री को चाहिए कि अपने पति की आज्ञा का पालन करें। भगवान शंकर सबसे सहज देवता हैं जो जल चढ़ाने पर भी प्रसन्न हो जाते हैं वह अपने पास कुछ नहीं रखते और भक्तों को किसी भी चीज की कमी रहने नहीं देते हैं ऐसे अवघड़ दानी है भगवान शिव। भाई-भाई में विवाद नहीं होना चाहिए, जहां सुमति है वही समृद्धि है, छतरपुर क्रांतिकारियों की भूमि है सनातन प्रकृति से जुड़ा हुआ धर्म है इसीलिए यह धर्म सबसे श्रेष्ठ है। ईशानगर को ईश्वर नगर बनाना है हिंदू एवं सनातनियों को अब जागने की जरूरत है, माता-पिता को दुख देने वाला कभी सुखी नहीं रहता प्रत्यक्ष देवता माता-पिता ही हैं। कथा का व्यास पूजन दिल्ली से पधारे सुबेश शर्मा एवं हरीश मिश्रा एवं कई महानुभावों ने किया। इस दौरान कथा में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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