बाउंड्रीवॉल निर्माण करने के एवज के एवज में ली थी 10 हजार की रिश्वतछतरपुर। साल 2019 में खेत में बाउंड्रीवॉल निर्माण करने के एवज में सचिव ने रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त पुलिस ने सचिव को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। कोर्ट ने आरोपी सचिव को रिश्वत के मामले में तीन साल की कठोर कैद के साथ दो हजार रुपए के जुर्माना की सजा दी है।एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि फरियादी रहमान बक्ष सौदागर ने 3 अप्रेल 2019 को लोकायुक्त पुलिस में शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत खौंप (निवारी) का सचिव मनोज खरे खेत में बाउंड्रीवॉल बनाने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। वह सचिव को रिश्वत नही देना चाहता और उसे रंगे हाथो पकड़वाना चाहता है। लोकायुक्त पुलिस ने रहमान को वॉयस रिकॉर्डर देकर सचिव मनोज खरे की रिश्वत मांगने की बात रिकॉर्ड कराई। 4 अप्रेल 2019 को ट्रेप दल फरियादी रहमान को लेकर छतरपुर आया। मोटे के महावीर मंदिर के पास सचिव मनोज खरे ने जैसे ही रहमान से रिश्वत की राशि ली तभी ट्रेप दल ने घेरा बंदी करके सचिव मनोज को रंगे हाथो गिरफ्तार किया।अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजन केके गौतम ने पैरवी करते हुए दलील रखी कि भ्रष्टाचार से जनता की नजर में लोकसेवकों की विश्वसनीयता कम हो रही है। भ्रष्टाचार से व्यक्ति का नैतिक और चारित्रिक पतन होता है। भ्रश्टाचार ने जनता की दृष्टि में अधिकारियों की विश्वसनीयता को कम कर दिया हैं। भ्रष्टाचार से देश की आर्थिक विकास की दिशा अवरुद्ध हो जाती है। इस समस्या ने समाज में सभी साधारण व्यक्तियों के जीवन को कष्टप्रद बना दिया है और गरीब व्यक्तियों के जीवन जीने के प्राकृतिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए आरोपी को कठोर से कठोर सजा दी जाए। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार जैन की अदालत ने फैसला सुनाया कि भ्रष्टाचार किया जाना एक विकराल समस्या हो गई है, जो समाज को खोखला कर रही है। भ्रष्टाचार लोकतंत्र और विधि के शासन की नीव को हिला रहा है। ऐसे मामलों में आरोपी को सजा देते समय नरम रुख अपनाया जाना विधि की मंशा के विपरीत है। कोर्ट ने आरोपी सचिव मनोज को दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तीन साल की कठोर कैद के साथ दो हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई।
रिश्वतखोर ग्राम पंचायत सचिव को तीन साल की कैद
June 14, 2024
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