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देश का भविष्‍य - हाथ में चप्‍पल लेकर कीचड भरे रास्‍ते से स्‍कूल जाने को मजबूर...देख कर उड जायेंगे होस

स्कूल चलो अभियान के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों की हालत खस्ता

छतरपुर/हरपालपुर। मध्यप्रदेश के दमोह जिले के जिला कलेक्टर सुधीर कोचर ने स्कूलों के निरीक्षण के दौरान 2 किलोमीटर कीचड़ भरी सड़क पर पैदल चल स्कूल जाने वाले छात्रों की समस्या को जाना। दमोह कलेक्टर के इस अनोखे अंदाज ने प्रदेश सरकार का ध्यान छात्र छात्रों की इस समस्या की ओर खींचा हैं। कुछ ऐसा ही हाल छतरपुर जिले की नौगॉव जनपद पंचायत अंतर्गत एक पंचायत ऐसी भी है जहां के स्कूली बच्चे दो फीट गहरे कीचड़ में से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। जिस रास्ते से इन्हें स्कूल जाना है उसे देखते ही शायद कोई इस रास्ते पर चलनी का सोचे।  इन बच्चों की स्कूल जाने की दिलचस्पी कहें, मजबूरी कहें या फिर ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव की निष्क्रियता कहें लेकिन इन बच्चों को इन सभी चीजों से कोई सरोकार नहीं है। वो बारिश में दलदल कीचड़ से भरे रास्ते से हाई स्कूल जाने को मजबूर हैं। बच्चे इस कीचड़ में हाथ में चप्पल, कंधे पर बैग और पूरी ड्रेस कीचड़ से सनी होने के बावजूद भी स्कूल जा रहे हैं। बच्चों की स्कूल जाने की जिद को देख परिजन भी मजबूर हैं।  ग्राम पंचायत रगौली में जलजीवन मिशन के तहत सड़कें खुदने के बाद उनकी मरम्मत न कर गड्डो को भरने के लिए मिट्टी डालने से बारिश में सड़कें दलदल में तब्दील हो गई हंै। यहां इतना कीचड़ है कि व्यक्ति दो फीट तक कीचड़ में धंस जाए। इसी मार्ग से प्रतिदिन छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है। स्कूल जाने के लिए इन्हें बकायदा हाथ में चप्पल, कंधे पर किताबों से भरा बस्ता और फिर कीचड़ से होकर स्कूल जाने का सफर तय करना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि सभी बच्चे इस मार्ग को पार कर लेते हैं कुछ तो कीचड़ में फंस जाने के डर रास्ते से ही लौट जाते हैं। खुदी पड़ी सड़क पर पंचायत द्वारा मिट्टीकरण किया गया है जो लगातार पानी बहने के कारण दलदल में तब्दील हो गया है और पूरे मार्ग में कीचड़ भर गया है।ऐसा नहीं है कि इस मार्ग से संबंधित शिकायत किसी से न की गई हो, बल्कि हाई स्कूल के प्राचार्य रजनीश रूसिया इस सम्बंध में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराने के बाद भी  किसी भी अधिकारी, जनप्रतिनिधि ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना छात्रों और यहां से निकलने वाले मवेशियों को करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन उन्हें गहरे गड्ढों में फंसे मवेशियों को निकालना पड़ता है।
इनका कहना
ग्राम पंचायत सचिव से बात कर कोई व्यवस्था करवाते हैं।
डॉ हरीश केसरवानी, सीईओ, जपं नौगांव
जलजीवन मिशन से सड़कें खुदी पड़ी हैं उस वजह से रास्ते खराब हो गए हैं।
 प्रमोद पाठक, सचिव ग्राम पंचायत रगौली

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