स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में वाल्मीकि जयंती पर हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डा0 आरिफ राइन ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यापर्ण कर किया। उन्होंने कहा कि रामायण में वाल्मीकि ने 24000 श्लोकों में श्रीराम उपाख्यान ‘रामायण’ लिखी। कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रचनाओं ने जीवन की हर अवस्था में मार्गदर्शन किया है और युगों युगों तक समाज को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण महाकाव्य हमें बिना किसी भेदभाव के जीवन जीने की सीख देती है। भगवान श्रीराम के आदर्श और संस्कारों से आपस में जोड़ने रखने का श्रेय महर्षि वाल्मीकि को जाता है।प्रवक्ता शिखा महान ने माता सीता तथा लव कुश के संरक्षक व शिक्षक के रुप में उनकी भूमिका से छात्र छात्राओं को रुबरू कराया। प्रवक्ता संतोश शर्मा ने वाल्मीकि को सुविख्यात दुष्टा, ऋषि व विश्व के प्रथम कवि के रुप में अपने विचार व्यक्त किए। प्रवक्ता मनोज यादव द्वारा वाल्मीकि के जीवन से संबन्धित वाल्यकाल से ऋषि होने तक विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रशांत शुक्ला, संदीप खरे, बसंत विश्वकर्ता सहित तमाम छात्रा छात्राओं ने महर्षि वाल्मीकि के चरणों में पुष्प अर्पित किए

