0 मकनियापुरा की छोटी मस्जिद में जश्न-ए-गौसुलवरा प्रोग्राम में नातिया कलाम किए पेश
शुभ न्यूज महोबा । शहर के मोहल्ला मकनियापुरा की छोटी मस्जिद में जश्न-ए-गौसुलवरा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर मौलाना और हाफिजों ने बडे़ पीस साहब की जिंदगी में रोशनी डालते हुए उनके बताए गए अमन के पैगाम से लोगों को रूबरू कराया। कार्यक्रम में नबी पर नातिया कलाम भी पेश किए गए जिस सुन मस्जिद में मौजूद लोग खामोशी से सुनते रहे। कार्यक्रम का संचालन हसन रजा द्वारा किया गया।
मकानियापुरा की छोटी मस्जिद में आयोजित प्रोग्राम की शुरुआत इकरार चिश्ती साहब ने कलाम पाक की तिलावत से की। कार्यक्रम में हजरत मौलाना सलीम राजा कादरी साहब ने खीताब करते हुए कहा कि गौस-ए-पाक हमेशा सच बोलते थे और उन्होंने सच बोलने का पैगाम दिया क्योंकि उन्होंने बचपन ही में 18 पारा कुराने पाक मां के पेट में याद कर लिया था और बड़े होकर उन्होंने तालीम हासिल कर तो लोगों को सच्चाई की तरफ आने की दावत दी। मौलाना हसन रजा ने बताया कि गौसे पाक जब बड़े होकर शिक्षा प्राप्त करने के लिए ईरान से बग़दाद काफिले के साथ जा रहे थे तब रास्ते में डाकुओं ने काफिले वालों को घेर लिया सब लोग अपनी जान माल बचा कर भागने लगे लेकिन गौस पाक न भागे और न ही झूठ बोला। उनकी सच्चाई को सुन कर जितने डाकू थे सब ने गुनाहो से तौबा कर ली।
कार्यक्रम में नात-ए-नबी गुनगुनाने के लिए जनाब साकिब रजा को दावत दी गई जिन्होंने बेहतरीन अंदाज में नात-ए-नबी पढ़ा और गोस-ए-पाक की शान में तकरीर की। मकनियापुरा की बड़ी मस्जिद के इमाम मौलाना खुर्शीद साहब ने गोस-ए-पाक की जिंदगी जिंदगी पर रोशनी डाली और उनके इल्मी मकाम को बताया साथ ही उनकी इबादत का ज़िक्र किया। हाफिज आमिर रजा ने शांति और अमन का पैगाम देते हुए नातिया कलाम पेश किया। मौलाना सईद मिस्बाही ने खिताब करते हुए गौसे पाक की सीरत का ज़िक्र किया उन्होंने बताया बड़े पीर साहब सूफी बुज़ुर्ग थे जिन्होंने शांति और अमन का पैगाम दिया। इस मौके पर अकबर अंसारी नईमुररहमान मास्टर मुबीन महफूज़ मुटटन हाजी लल्लू मुखिया अनीस अंसारी वली मंसूरी तौफीक खान नसीम के अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे जिन्होंने महफिल को कामयाब बनाया। अंत में सभी लोगों ने सलाम पढ़ते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

