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वाह रे स्वच्छता अभियान ! अपनी ही दुर्दशा पर आंसू बहा रही कलेक्ट्रेट कार्यालय में बनी पानी की टंकी जिला प्रशासन की नाक के नीचे उदासीनता, इसी टंकी का पानी पीने को मजबूर रहते हैं ग्रामीण


टीकमगढ़। जहां शासन- जिला प्रशासन स्वच्छता के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए के बजट को खर्च कर रहा है वहीं कुछेक स्थानों पर स्वच्छता की स्थिति को देखकर ऐसा नजर आता है कि यह सब ढोंग और आडंबर है क्योंकि वास्तविक स्वच्छता तो बहुत ही कम दिखती है लेकिन स्वच्छता के नाम पर झाड़ू लगाना फोटो खिंचवाना और अखबारों में छपना चैंनेलो की सुर्खियां बनना यह ज्यादा ही कुछ दिखता है जबकि वास्तविक स्वच्छता बहुत ही कम प्रतिशत में नजर आती है लेकिन शासन जिला प्रशासन इस मामले में बजट लाखों करोड़ों रुपए का खर्च कर रहा है जी हां हम बात कर रहे हैं इस पानी की टंकी की जहां यह पानी की टंकी कहीं दूर नहीं जिला मुख्यालय पर स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय के प्रांगण में यह पानी की टंकी निर्मित है जिसकी हालत देखकर ऐसा लगता है कि शायद इस टंकी की ओर स्वच्छता की कोई बात ही नहीं है इस टंकी का रंग रूप देखकर और इसकी जर्जरता को देखकर ऐसा लगता है कि जहां जिला प्रशासन के आला अधिकारी कभी सड़कों पर तो कभी तालाबों पर झाड़ू पकड़ कर

स्वच्छता का ढोंग करते हैं वहीं जिला प्रशासन की नाक के नीचे बनी यह पानी की टंकी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है इतना ही नहीं इस पानी की टंकी का उपयोग भी है जहां जनसुनवाई सहित अपने विभिन्न कार्यों को लेकर आने वाले ग्रामीण अंचल के लोग इस पानी की टंकी में भरे हुए पानी को पीने के लिए मजबूर हैं क्योंकि यह पानी की टंकी भरी भी जाती है इसमें नल भी लगे हुए हैं लेकिन इसकी स्वच्छता और साफ सफाई को अगर देखा जाए तो ऐसा लगता है कि जैसे इसमें कभी कोई कार्य ही नहीं किया जाता जबकि यह पानी की टंकी जिला प्रशासन की बिल्कुल नाक के नीचे बनी हुई है जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के वाहन भी इसी टंकी के इर्द -गिर्द रोजाना खड़े होते हैं आला अधिकारियों की नजर भी इस टंकी पर रोजाना जाती है लेकिन इस पानी की टंकी का जीणोद्धार आज तक नहीं हुआ यह पानी की टंकी ऊपरी सतह पर ढकी भी है तो ऐसी की आधी खुली और आधी ढकी सी है जिसमें घास फूस इतना उग आया है कि वह अलग से दिखता है और उसी में पानी भरा रहता है और वही पानी कलेक्ट्रेट कार्यालय अपने कार्यों के लिए आए ग्रामीण पीते नजर आते हैं। अधिकारियों के लिए तो प्रत्येक विभाग में फिल्टर पानी के कैंपर रोजाना आते हैं और उसका शुद्ध पानी अधिकारी कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों में पीते हैं लेकिन बेचारे ग्रामीणदूर दराज से आए इस पानी की टंकी में भरे पानी को पीने के लिए ही मजबूर रहते हैं जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की उदासीनता यहां स्पष्ट देखने को मिलती है कि स्वच्छता के नाम पर जो बजट उड़ाया जा रहा है उसका क्या आलम है जब जिला प्रशासन की नाक के नीचे ही स्वच्छता की यह स्थिति है तो जिले भर में स्वच्छता के नाम पर क्या होता होगा यह तो इस पानी की टंकी की दुर्दशा को देखकर ही स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है आगर जिला प्रशासन चाहे तो इस टंकी का रंग रोगन और सुंदर रूप बनाया जा सकता है और इसको ऊपर से अच्छी तरह से ढका जाकर इसमें शुद्ध पानी और साफ सुथरा रखरखाव इसका हो सकता है और इसके नलों की व्यवस्था भी सुंदर और सुशोभित हो सकती है लेकिन जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते यह पानी की टंकी अपने ही हाल पर रो रही है।


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