टीकमगढ़। विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को जिला पुस्तकालय में आयोजित एक परिचर्चा में अध्यक्षता कर रहे डॉ. के.एल. जैन, पूर्व अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, जबलपुर संभाग ने शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि समस्त विश्व में शिक्षक सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। शिक्षकों की गरिमा बनाए रखना राष्ट्र और समाज का दायित्व है इसके बिना कोई भी राष्ट्र ऊंचा नहीं उठ सकता। इसी तरह चरित्रवान युवा पीढ़ी ही राष्ट्र को आगे ले जाने में समर्थ होती हैं। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा पत्रिका के संस्थापक संपादक श्री सुरेंद्रनाथ दुबे की पुस्तक 'एक विश्व: 200 करोड़ बच्चों के नाम एक खुला पत्र' के स्कूल शिक्षा द्विभाषिक मासिक पत्रिका भोपाल विशेषांक और जिला पुस्तकालय की ई पत्रिका 'युवा विमर्श' का विमोचन भी किया गया। एक विश्व पुस्तक के अंग्रेजी संस्करण का अनुवाद एवं संपादन साहित्यकार राम गोपाल रैकवार ने किया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शीलचंद्र जैन ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान एक सामाजिक कर्तव्य है। शिक्षक ही व्यक्ति, राष्ट्र और विश्व का निर्माण करते हैं। विशिष्ट अतिथि अजीत श्रीवास्तव ने युवाओं को जीवन में आगे बढ़ाने के सूत्र बताए। साहित्यकार रामस्वरूप दीक्षित ने कहा कि एक विश्व: एक परिवार की अवधारणा के लिए हमें किसी आयातित विचार की आवश्यकता नहीं है। 'वसुदेव कुटुंबकम' की भावना हमारी संस्कृति का अंग है। युवा शिक्षक रवींद्र यादव ने कहा कि युवा पीढ़ी किसी के आश्रित नहीं होती है वह अपना मार्ग स्वयं बनाती है। युवा छात्र पवन सोनी, कमलेश यादव एवं छात्रा कंचन ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। परिचर्चा का संचालन रामगोपाल रैकवार ने किया। उन्होंने बताया कि यूनेस्को द्वारा घोषित 5 अक्टूबर सन 1966 में 'शिक्षक गरिमा' (शिक्षकों की प्रस्थिति) घोषणा पत्र की स्मृति में 'विश्व शिक्षक दिवस' भारत के प्रस्ताव पर ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा सन 1994 में घोषित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य रूप से लाइब्रेरियन विजय मेहरा, राजीव नामदेव राना लिधौरी एड. डी पी यादव, गुलाब सिंह यादव, राज्यपाल पुरस्कार सम्मानित शिक्षक शफी मोहम्मद, युवा विमर्श पत्रिका की संपादक डॉ. विनीता नाग, कनाया नाग अक्षांश मेहरा आदि के साथ-साथ अनेक छात्र-छात्राएं एवं नियमित पाठक उपस्थित रहे।
शिक्षक गरिमा प्रतिष्ठापन का दायित्व समाज और राष्ट्र का है- डॉ.के.एल. जैन, एक विश्व पुस्तक एवं युवा विमर्श की पत्रिका का किया गया विमोचन:
October 06, 2024
टीकमगढ़। विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को जिला पुस्तकालय में आयोजित एक परिचर्चा में अध्यक्षता कर रहे डॉ. के.एल. जैन, पूर्व अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, जबलपुर संभाग ने शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि समस्त विश्व में शिक्षक सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। शिक्षकों की गरिमा बनाए रखना राष्ट्र और समाज का दायित्व है इसके बिना कोई भी राष्ट्र ऊंचा नहीं उठ सकता। इसी तरह चरित्रवान युवा पीढ़ी ही राष्ट्र को आगे ले जाने में समर्थ होती हैं। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा पत्रिका के संस्थापक संपादक श्री सुरेंद्रनाथ दुबे की पुस्तक 'एक विश्व: 200 करोड़ बच्चों के नाम एक खुला पत्र' के स्कूल शिक्षा द्विभाषिक मासिक पत्रिका भोपाल विशेषांक और जिला पुस्तकालय की ई पत्रिका 'युवा विमर्श' का विमोचन भी किया गया। एक विश्व पुस्तक के अंग्रेजी संस्करण का अनुवाद एवं संपादन साहित्यकार राम गोपाल रैकवार ने किया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शीलचंद्र जैन ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान एक सामाजिक कर्तव्य है। शिक्षक ही व्यक्ति, राष्ट्र और विश्व का निर्माण करते हैं। विशिष्ट अतिथि अजीत श्रीवास्तव ने युवाओं को जीवन में आगे बढ़ाने के सूत्र बताए। साहित्यकार रामस्वरूप दीक्षित ने कहा कि एक विश्व: एक परिवार की अवधारणा के लिए हमें किसी आयातित विचार की आवश्यकता नहीं है। 'वसुदेव कुटुंबकम' की भावना हमारी संस्कृति का अंग है। युवा शिक्षक रवींद्र यादव ने कहा कि युवा पीढ़ी किसी के आश्रित नहीं होती है वह अपना मार्ग स्वयं बनाती है। युवा छात्र पवन सोनी, कमलेश यादव एवं छात्रा कंचन ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। परिचर्चा का संचालन रामगोपाल रैकवार ने किया। उन्होंने बताया कि यूनेस्को द्वारा घोषित 5 अक्टूबर सन 1966 में 'शिक्षक गरिमा' (शिक्षकों की प्रस्थिति) घोषणा पत्र की स्मृति में 'विश्व शिक्षक दिवस' भारत के प्रस्ताव पर ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा सन 1994 में घोषित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य रूप से लाइब्रेरियन विजय मेहरा, राजीव नामदेव राना लिधौरी एड. डी पी यादव, गुलाब सिंह यादव, राज्यपाल पुरस्कार सम्मानित शिक्षक शफी मोहम्मद, युवा विमर्श पत्रिका की संपादक डॉ. विनीता नाग, कनाया नाग अक्षांश मेहरा आदि के साथ-साथ अनेक छात्र-छात्राएं एवं नियमित पाठक उपस्थित रहे।
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