टीकमगढ़ । शहर में नया मंदिर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान चल रहा है विधान में समाज को धर्म लाभ मिले माता जी से समस्त जैन समाज के विशेष निवेदन पर सिद्ध क्षेत्र आहार जी से लखौरा एवं लखोरा से होती हुई जैन कॉलोनी पहुंची अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने बताया कि माता जी की अगवानी के लिए सैकड़ो की संख्या में इंद्र इंद्राणियां अपने विशेष परिधान में पहुंचकर अगवानी करती हुई गौशाला आसरा गौ सेवा केंद्र पर रुक कर सभी को आशीर्वाद दिया और नए मंदिर जी तक पहुंचे वहां पर माताजी के प्रवचन हुये 105 प्रसन्न मति माताजी ने कहा की टीकमगढ़ वासियो का अति पुण्य का उदय है कि सहज ही साधु का सानिध्य मिल जाता है आप सभी सिद्धों की आराधना कर रहे हैं इसमें कर्मों की निर्जला होती है । सिद्धों की आराधना करने से कर्मों का क्षय होता है 105 कीर्ति मति माताजी ने कहा कि यह सिद्ध चक्र विधान बहुत ही कर्मों का निर्जला करने वाला है यही धार्मिक अनुष्ठान का नाम विधान होता है। आप सभी मन वचन पूर्वक आराधना कर रहे हैं आप सभी टीकमगढ़ वासि बहुत पुण्यवान हैयह अष्टानिका का पर्व ऐसा पर्व है कि मनुष्य तो पूजा करते हैं इस दिनों में देवता भी पूजा करते हैं इसलिए इस पर्व का बहुत ही महत्व है यह भक्ति संसार समुद्र से पार करने के लिए होती है आपका पुण्य जब तीव्र होता है तो गुरु सहज जी मिल जाते हैं इसके बाद विद्वान संजू शास्त्री विद्वान मयंक शास्त्री ने विधान करवाया जिसमें भक्ति के गीतों पर अनेक श्रोता झूमते नजर आए इस मौके पर सैकड़ो की संख्या में लोग मौजूद रहे
परम पूज्य मां 105 कीर्ति मति माताजी एवं 105 प्रसन्न मति माताजी सत्संग की हुई भव्य अगवानी
November 10, 2024
टीकमगढ़ । शहर में नया मंदिर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान चल रहा है विधान में समाज को धर्म लाभ मिले माता जी से समस्त जैन समाज के विशेष निवेदन पर सिद्ध क्षेत्र आहार जी से लखौरा एवं लखोरा से होती हुई जैन कॉलोनी पहुंची अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने बताया कि माता जी की अगवानी के लिए सैकड़ो की संख्या में इंद्र इंद्राणियां अपने विशेष परिधान में पहुंचकर अगवानी करती हुई गौशाला आसरा गौ सेवा केंद्र पर रुक कर सभी को आशीर्वाद दिया और नए मंदिर जी तक पहुंचे वहां पर माताजी के प्रवचन हुये 105 प्रसन्न मति माताजी ने कहा की टीकमगढ़ वासियो का अति पुण्य का उदय है कि सहज ही साधु का सानिध्य मिल जाता है आप सभी सिद्धों की आराधना कर रहे हैं इसमें कर्मों की निर्जला होती है । सिद्धों की आराधना करने से कर्मों का क्षय होता है 105 कीर्ति मति माताजी ने कहा कि यह सिद्ध चक्र विधान बहुत ही कर्मों का निर्जला करने वाला है यही धार्मिक अनुष्ठान का नाम विधान होता है। आप सभी मन वचन पूर्वक आराधना कर रहे हैं आप सभी टीकमगढ़ वासि बहुत पुण्यवान हैयह अष्टानिका का पर्व ऐसा पर्व है कि मनुष्य तो पूजा करते हैं इस दिनों में देवता भी पूजा करते हैं इसलिए इस पर्व का बहुत ही महत्व है यह भक्ति संसार समुद्र से पार करने के लिए होती है आपका पुण्य जब तीव्र होता है तो गुरु सहज जी मिल जाते हैं इसके बाद विद्वान संजू शास्त्री विद्वान मयंक शास्त्री ने विधान करवाया जिसमें भक्ति के गीतों पर अनेक श्रोता झूमते नजर आए इस मौके पर सैकड़ो की संख्या में लोग मौजूद रहे
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