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बुंदेली गीतों के माध्यम से कार्तिक मास के महत्व पर डाला गया प्रकाश




 

0 संगीतमय सुंददकांड पाठ के अलावा बुंदेली गीतों और बुंदेली भाषा से कराया गया रुबरू
शुभ न्यूज महोबा ।  भाईदूज की पूर्व सध्या पर आदर्श रामचरित पार्टी व अमर बुंदेली लोक संगीत पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में शहर के मोहल्ला माथुरनपुरा स्थित बैजनाथ मुनीम के घर पर रविवार की रात संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया साथ ही बुंदेली संस्कृति पर वक्ताओं द्वारा प्रकाश भी डाला गया। कार्यक्रम में देर रात्रि तक बुंदेली गीतों के माध्यम से उपस्थित लोगों का मनोरंजन भी कराया गया।
संगीतमय सुंदरकांड पाठ करने के बाद बुंदेली कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसको संबोधित करते हुए पार्टी सचिव पूर्व प्रवक्ता डा0 एलसी अनुरागी ने कार्तिक मास का महत्व गीतों के माध्यम से बताते हुए कहा कि आली मौहे लागै गोरखगिरि नीको, गोरखगिरि में शिवतांडव जू बिराजे दर्शन करे से न चूको। इसके बाद उन्होंने बुंदेली गीत नाथ मोहे कीजे ब्रज की मोर। लागो कृष्ण चरण मन मेरो। बिहारीजू है तुम लौ मेरी दौर। चलो मन गंगा जमुना तीर सहित अन्य गीतों के माध्यम से उपस्थित लोगों की वाहवाही लूटी। राजकुमार अनुरागी, तुलसीदास, कन्धीलाल आदि ने भी बुंदेली गीत प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के आयोजक बैजनाथ मुनीम ने कहा कि बुंदेली भाषा मध्य भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाने वाली एक इंडो आर्यन भाषा है, यह पश्चिमी हिन्दी उपसमूह का हिस्सा है। कहा कि बुंदेली भाषा में अनूठे शब्द हैं जो सदियों से आज तक इस्तेमाल में आ रहे हैं। प्राचीन काल में बुंदेली में शासकीय पत्र व्यवहार, संदेश, बीजक, राजपत्र, मैत्री संधियों के अभिलेख प्रचुर मात्रा में मिलते है। ढोलक पर कन्धीलाल ने और बैंजू पर मथुराप्रसाद ने शानदार संगीत की प्रस्तुति दी। अंत में सभी लोगों का आयोजक द्वारा अभार व्यक्त कर प्रसाद वितरण किया गया।


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