फोटो एमएएचपी 04 परिचय- रामलीला का मंचन करते कलाकार।
शुभ न्यूज जैतपुर महोबा। बेलाताल में चल रही रामलीला के 15वें दिन कुंभकरण मेघनाथ वध व सती सिलोचना की लीला का कलाकारों द्वारा बेहतर मंचन किया गया। रामलीला का मंचन देखने के लिए लोगों की खासी भीड़ जुटी रही और रामलीला देख दर्शक भाव विभोर हो गए। रामलीला के अंत में श्री आदर्श रामलीला सांस्कृतिक मंच द्वारा कलाकारों को सम्मानित किया गया।
रामलीला महोत्सव मंच पर गुरूवार की रात हुए मंचन में दर्शाया गया कि गहरी नींद में सो रहे कुम्भकरण को जगाने के लिए लंका पति रावण द्वारा बहुत प्रयास किया गया। तमाम प्रयासों के बाद जैसे ही कुम्भकरण जागता है उसे जमकर मदिरा पान का सेवन कराया गया, नशे में धुत कुम्भकरण रणभूमि में जाने के लिए तैयार हो जाता है और रणभूमि में कुम्भकरण को देख वानर सेना में कुछ समय के लिए खलबली मच जाती है, जिस पर प्रभु श्रीराम अपने एक ही बाण से उसका बध कर देते हैं। गुप्तचरों द्वारा जब रावण को कुम्भकरण की मृत्यु की सूचना मिलती है, तो लंकापति और अधिक क्रोध हो जाता है और इसके बाद अपने पुत्र मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजता है। युद्ध के पहले मेघनाथदेवी की आराधना कर शक्ति मांगने का प्रयास करता है इसकी जानकारी जब प्रभु श्रीराम को लगती है कि वह हनुमान को भेज करके उसका अनुष्ठान खत्म कर देते हैं और मेघनाथ का अनुष्ठान पूरा न होने से क्रोधित होकर युद्ध के लिए चला जाता है।
युद्ध भूमि पर लक्ष्मण और मेघनाथ का घनघोर युद्ध होता है और अंतः शेष अवतार लक्ष्मण मेघनाथ का वध कर देते हैं। दुखी सिलोचना अपने पति मेघनाथ का सिर लेने के लिए रामा दल पहुंचती हैं सती सिलोचना का गंभीर अभिनय को देख दर्शक तालिया बजाते हैं। रामलीला कलाकारों के अलावा अन्य कार्य में सहयोग करने वाले दाताराम रैकवार दीनदयाल रैकवार रंजीत प्रजापत अंजू प्रजापत दिस्सू रैकवार को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आदित्यनाथ शर्माएवं मलखान सिंह यादव के द्वारा किया गया। इस मौके पर बृजेश महाराज बृजभूषण गुप्ता बडडे नायक सौरव भार्गव इंद्रपाल रिछारिया आदि मौजूद रहे।
रामलीला महोत्सव मंच पर गुरूवार की रात हुए मंचन में दर्शाया गया कि गहरी नींद में सो रहे कुम्भकरण को जगाने के लिए लंका पति रावण द्वारा बहुत प्रयास किया गया। तमाम प्रयासों के बाद जैसे ही कुम्भकरण जागता है उसे जमकर मदिरा पान का सेवन कराया गया, नशे में धुत कुम्भकरण रणभूमि में जाने के लिए तैयार हो जाता है और रणभूमि में कुम्भकरण को देख वानर सेना में कुछ समय के लिए खलबली मच जाती है, जिस पर प्रभु श्रीराम अपने एक ही बाण से उसका बध कर देते हैं। गुप्तचरों द्वारा जब रावण को कुम्भकरण की मृत्यु की सूचना मिलती है, तो लंकापति और अधिक क्रोध हो जाता है और इसके बाद अपने पुत्र मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजता है। युद्ध के पहले मेघनाथदेवी की आराधना कर शक्ति मांगने का प्रयास करता है इसकी जानकारी जब प्रभु श्रीराम को लगती है कि वह हनुमान को भेज करके उसका अनुष्ठान खत्म कर देते हैं और मेघनाथ का अनुष्ठान पूरा न होने से क्रोधित होकर युद्ध के लिए चला जाता है।
युद्ध भूमि पर लक्ष्मण और मेघनाथ का घनघोर युद्ध होता है और अंतः शेष अवतार लक्ष्मण मेघनाथ का वध कर देते हैं। दुखी सिलोचना अपने पति मेघनाथ का सिर लेने के लिए रामा दल पहुंचती हैं सती सिलोचना का गंभीर अभिनय को देख दर्शक तालिया बजाते हैं। रामलीला कलाकारों के अलावा अन्य कार्य में सहयोग करने वाले दाताराम रैकवार दीनदयाल रैकवार रंजीत प्रजापत अंजू प्रजापत दिस्सू रैकवार को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आदित्यनाथ शर्माएवं मलखान सिंह यादव के द्वारा किया गया। इस मौके पर बृजेश महाराज बृजभूषण गुप्ता बडडे नायक सौरव भार्गव इंद्रपाल रिछारिया आदि मौजूद रहे।

