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कैसी सरकार, कैसे जनप्रतिनिधि,मामला किसानों के लिए खाद वितरण का किसानों के साथ हर वक्त खड़ा रहने के दावे और वायदे दिख रहे खोखले


टीकमगढ़। चाहे किसी भी पार्टी का जनप्रतिनिधि हो या फिर कोई सरकार का बड़ा नुमाइंदा हर वक्त किसानो की बात कहता है और किसानों के मुद्दों को लेकर ही ज्यादातर अपनी -अपनी राजनीति चमकाई जाती है एवं किसानों को 100 में 100 प्रतिशत उनकीं सुविधाओं को देने के लिए दावे बायदे किए जाते हैं लेकिन जब किसानों को खाद बीज आदि की आवश्यकता होती है तब वही किसान परेशान होता है और उसकी समस्याओं का निवटारा भी किसान की इच्छाओं के अनुसार नहीं होता। जी हां,हम बात कर रहे हैं आजकल जिले के लिए बनाए गए खाद्य वितरण केंद्र की जहां किसान तो ठीक महिलाएं बच्चियां भी पूरे दिन-दिन भर लाइन में लगी रहती हैं और उसके बाद भी उन्हें खाद्य नसीब नहीं हो रहा है जिला प्रशासन की जो भी व्यवस्थाएं कीं गईं है वह ठीक-ठाक नहीं है जिसके चलते किसान जिले में खाद के लिए परेशान हो रहे हैं कृषि उपज मंडी ढोंगा पर बनाए गए खाद वितरण केंद्र पर पूरे दिन किसानों की इस कदर भीड़ और मारामारी रहती है कि किसान बेचारा परेशान हो रहा है लेकिन जनप्रतिनिधि व सरकार के नुमायदें और प्रशासन की पहल इस और कारगर साबित दिखाई नहीं दे रही है। लाइन में लग-लग कर किसान परेशान नजर आ रहा है और फिर भी उसे खाद सही समय से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है मंगलवार 12 नवंबर 2024 को मंडी गेट पर महिलाओं ने खाद्य ना मिलने से जाम लगा दिया वहीं इस कदर भीड़ किसानों की वितरण केंद्र पर दिखी कि लोग अपने आप को संभाल नहीं पा रहे थे इस तरह की व्यवस्थाओं को देखकर ऐसा लगता है कि जो भी जनप्रतिनिधि और सरकार के नुमायदें किसानों को लेकर वायदे करते हैं वह पूरी तरह से खोखले और सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए किए जाते हैं जबकि किसान बेचारा आज भी जस के तस हालातो में दिखाई देता है। उल्लेखनीय है कि ऐसी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है जो किसानों की बात नहीं करती हो और ना ही कोई ऐसा जनप्रतिनिधि है जो किसानों की बात ना किया करता हो लेकिन जब किसानों को जनप्रतिनिधि और सरकार की जरूरत पड़ती है तो यह मुंह मोड़ते दिखते हैं और सभी जनप्रतिनिधि व सरकार खामोश नजर आती है जहां किसान बेचारे परेशान होते रहते हैं हालाकि राजनीति भी किसानों के मुद्दे को लेकर ज्यादातर की जाती है और जनप्रतिनिधि अपने चंद स्वार्थ के लिए किसानों के साथ हमेशा रहने और उनका हर वक्त साथ देने की बात करते हैं लेकिन जब जनप्रतिनिधियों का स्वार्थ सिद्ध हो जाता है तो उसके बाद किसानों को कोई साथ देता नजर नहीं आता है।


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