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जनसुनवाई या दिखावा, अधिकारी मस्त, जनता त्रस्त


पट्टे की जमीन की एक नकल के लिए 4 महीना से जनसुनवाई के चक्कर काट रहा युवक 

शासकीय सिस्टम से त्रस्त होकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा राघवेंद्र...सुने उसी की जुवानी

छतरपुर/ पट्टे की जमीन की एक नकल पाने के लिए युवक 4 महीनों से विभागीय अधिकारियों सहित जनसुनवाई के चक्कर काट काट कर परेशान हो गया लेकिन उसे जिला प्रशासन के अधिकारी एक जमीन की नकल तक नहीं दिला सके, यह है छतरपुर जिले का शासकीय सिस्टम, मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर से लेकर सभी विभागों के अधिकारी लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए बैठते हैं लेकिन यह जनसुनवाई इन दिनों पीड़ितों के लिए चक्रव्यूह बन गई है जहां पर चक्कर काट काट कर थक हार कर जब उन्हें न्याय नहीं मिलता तो जनसुनवाई में ही ज्वलंतशील पदार्थ लेकर आत्मदाह करने के लिए मजबूर हो जाते हैं, इस तरह के कई मामले अब तक सामने आ चुके हैं 

 ऐसा ही एक मामला एक पीड़ित युवक राघवेंद्र दुबे का सामने आया है, जिला प्रशासन के भ्रष्टाचारी तंत्र का शिकार युवा के जिला पंचायत के बाहर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन पर बैठ गया, बात यहीं खत्म नहीं होती जनसुनवाई छतरपुर जिले में केवल दिखावा ही साबित हो रही है क्योंकि जनसुनवाई में आवेदन लेकर महीना चक्कर काटने के बाद भी पीड़ितों की समस्याएं हल नहीं होती अंत में  पीड़ितों के द्वारा जनसुनवाई में कोई डीजल डालकर तो कोई पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने पर उतारू हो जाता है, तो कोई जनसुनवाई में ही आवेदन देकर इच्छा मृत्यु मांग रहा है, अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा यह युवक राघवेंद्र है जो एक जमीन की नकल पाने के लिए किस तरह परेशान है यह आप उसी की जवानी सुन सकते हैं, और देखें कि जिले के अधिकारी जनसुनवाई में आने वाले आवेदनों के निराकरण में कितनी सक्रिय और सजग हैं, 

जिला पंचायत के बाहर अनिश्चितकालीन धरने प्रदर्शन पर बैठे राघवेंद्र ने बताया कि उसे खसरा नंबर 697 रकवा 1.0190 है.  लखनगुंवा की पट्टे  की जमीन की नकल चाहिए थी जिसका प्रकरण क्रमांक 44वी 121/ 75_ 76 आदेश दिनांक 23/11/1983 को आवंटित हुआ था जिसकी नकल पाने के लिए उकसी चप्पलें तक घिस गई, वह चार महीने से विभागीय अधिकारियों के चक्कर लगा लगाकर परेशान है साथ ही चार महीना से वह जनसुनवाई में कई आवेदन दे चुका है लेकिन उसे जनसुनवाई में आश्वासन के शिवाय कुछ नहीं मिला, अंत में उसे  एक जमीन की नकल पाने के लिए अनिश्चितकालीन धरने प्रदर्शन पर बैठना पड़ा, यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई मामले ऐसे आ चुके हैं जिसमें जनसुनवाई में आवेदन दे देकर परेशान पीड़ितों ने जनसुनवाई में ही आकर अपने ऊपर डीजल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया, इससे सब जाहिर होता है कि जनसुनवाई में अधिकारी बैठकर सिर्फ और सिर्फ दिखावा कर रहे हैं, जिला प्रशासन पूरी तरह से जनसुनवाई में लोगों की समस्या दूर करने में विफल साबित हो रहा है इतना ही नहीं 17 दिसंबर को एक रिटायर्ड फौजी ने भी जनसुनवाई में आवेदन देकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है बताया जा रहा है कि रिटायर्ड फौजी 5 सालों से सिस्टम की मार  झेल रहा है फिर भी उसे न्याय नहीं मिला...


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