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भारतीय संविधान नागरिकों के अधिकारों की करता हैं रक्षा : एलसी अनुरागी



0 10 दिसम्बर को मानव अधिकार दिवस पर विशेष
शुभ न्यूज महोबा। मानव अधिकार दिवस के मौके पर पूर्व प्रवक्ता डा0 एलसी अनुरागी ने कहा कि मानव अधिकारों की भावना का मुख्य तत्व विश्य बंधुत्व की भावना पर आधारित है, वे अधिकार जो मानव गरिमा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्हें मानवाधिकार कहा जाता है। मानवाधिकार नागरिकों का सुरक्षा कवच है। सर्वप्रथम इंग्लैंड में 1215 में मैग्नाकार्टा घोषणा पत्र जारी हुआ था जिसमें जनता ने इंग्लैंड के राजा जान से लोकतंत्र रक्षार्थ मैग्नाकार्टा पर हस्ताक्षर करवाए कि किसी भी व्यक्ति को उस समय तक बंदी न बनाया जाए जब तक कि उसका अपराध सिद्ध न हो जाए।
पूर्व प्रवक्ता ने बताया कि इसी प्रकार इंग्लैंड मे ही बिल आफ राइट्स 1689 परित हुआ, जिसके अंतर्गत यह व्यवस्था थी कि राजा संसद की अनुमति के बिना कोई भी टैक्स नहीं लगाएगा और न ही किसी कानून को समाप्त करेगा। इसी तर्ज पर स्वतंत्रता समानता भाईचारे व लोकतंत्र लाने के लिए अमेरिका में भी 4 जुलाई 1776 में स्वतंत्रता का घोषणा पत्र प्रकट हुआ। 1789 में फ्रांस में राज्य क्रांति हुई, 1917 में रूस में साम्यवादी क्रांति हुई तथा भारत में 1931 में भारतीय राष्ट्रीय क्रांग्रेस के करांची अधिवेशन में मौलिक अधिकारों की मांग उठी और अंत में विश्व बंधुत्व के लिए 10 दिसम्बर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने सर्वसम्मति से मानवाधिकार का घोषणा पत्र पारित किया था। बताया कि घोषणा पत्र की प्रस्तावना में 30 अनुच्छेद हैं। इस घोषणा पत्र में नागरिकों, राजनीतिक, सामाजि, आर्थिक काम का अधिकार समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार ट्रेड यूनियनों विश्राम, शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार सामाजिक भरण पोषण का अधिकार, जीवन का अधिकार, विचार धर्म शांतिपूर्ण सभाएं करने तथा संगठन बनाने जैसे अधिकार सम्मिलित हैं।
उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के भाग 3 में मौलिक अधिकारों की व्यवस्था की गई जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 से लेकर 22 में स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लेख है। अनुच्छेद 23 व 24 द्वारा नागरिकों के शोषण के विरुद्ध अधिकार दिए गए हैं। अनुच्छेद 25 व 28 में नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रा के अधिकार प्रदान किए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 में संस्कृति एवं शिक्षा के अधिकार दिए गए है। संवैधानिक उपचार के अनुच्छेद 32 द्वारा उपलब्ध कराए गए है, जिसके अनुसार किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन होने पर न्यायालय द्वारा पांच प्रकार के आदेश जारी किए जासकते हैं। बंदी प्रत्क्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा। मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए 12 अक्टूबर 1993 को भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया था।


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