डा अम्बेडकर की पुन्य तिथि विशेष
उक्त जानकारी वीरभूमि के पूर्व प्रवक्ता डा0 एलसी अनुरागी ने वार्ता दौरान कही। उन्होंने बताया कि किसी भी देश के नागरिकों काविकास मौलिक अधिकारों के बिना व कर्तव्य पालन के बिना नहीं हो सकता। भारतीय संविधान के भाग तीन में छह मौलिक अधिकार समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबन्धी संवैधानिक उपचारों का अधिकार दिए गए हैं, जिसे अम्बेडकर ने संविधान का हृदय तथा आत्मा कहा है। अधिकारों के अलावा नागरिकों को संविधान में ग्यारह मौलिक कर्तव्य दिए गए। डा0 अम्बेडकर के बनाए गए संविधान के अनुसार शासन करने से केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया मे भी शांति का माहौल बना रहेगा, क्योकि भारतीय संविधान वसुधैव कुटुम्बकम का प्रतीक है।
वर्तमान में 22 भाग 12 अनुसूचिया हैं भातीय संविधान में
अम्बेडकर ने विश्व के संविधानों की सभी अच्छाईयां सम्मिलित की है, जबकि अमेरिका संविधान से भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार लिए गए हैं और रुस के संविधान से मौलिक कर्तव्य लिए गए। आयरलैंड के संविधान से राज्य के नीति निर्देशक तत्व लिए, दक्षिण अफ्रीका के संविधान से संशोधन प्रणाली ली गई, आस्ट्रेलिया संविधान से समवर्ती सूची की व्यवस्था ग्रहण की गई, जापान के संविधान से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया शब्द, फ्रांस के संविधान से गणतंत्र व्यवस्था और इंग्लैण्ड के संविधान से संसदीय प्रणाली व्यवस्था को लिया गया, इसलिए यह दुनिया का अनौखा सबसे बड़ा व सर्वश्रेष्ठ संविधान बन गया है। भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद 22 भाग एवं 8 अनुसूचियां थी, लेकिन वर्तमान में 450 से अधिक अचुच्छेद, 22 भाग एवं 12 अनुसूचियां हैं। जबकि अमेरिका के संविधान में केवल सात अनुच्छे है। कनाडा के संविधान में 147 अनुच्छेद, आस्ट्रेलिया के सवंधिन में 128 अनुच्छेद, दक्षिण अफ्रीका के संविधान में 153 अनुच्छेद हैं।

