चंद्रकुंवर तिवारी पब्लिक स्कूल में ब्रह्मानंद महाराज की जयंती पर कार्यक्रम हुआ आयोजित
शुभ न्यूज महोबा। चंद्रकुंवर तिवारी पब्लिक स्कूल महोबा में ब्रह्मानंद महाराज की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां पर प्राधाचार्य अखिलेश खरे द्वारा ब्रह्मानंद महाराज के चित्र पर माल्यापर्ण किया गया साथ ही बच्चों ने भी पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। इस मौके पर शिक्षकों ने महाराज के जीवन में बारी बारी से प्रकाश डालते हुए उनके बताए गए मार्ग पर चलने की स्कूली बच्चों को प्रेरणा दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य ने कहा कि स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 04 दिसंबर 1894 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज के पिता का नाम मातादीन लोधी तथा माता का नाम जशोदाबाई था। स्वामी ब्रह्मानंद के बचपन का नाम शिवदयाल था। कहा कि संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी ब्रह्मानंद ने सम्पूर्ण भारत के तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। इसी बीच उनका अनेक महान साधु संतों से संपर्क हुआ और इसी बीच उन्हें गीता रहस्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि स्वामी जी सन 1921 में गाँधी जी के संपर्क में आकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। स्वतंत्रता आन्दोलन में भी स्वामी ब्रह्मानंद ने बढ चढकर हिस्सा लिया। 1928 में गाँधी जी स्वामी ब्रह्मानंद के प्रयासों से राठ पधारे। 1930 में स्वामी जी ने नमक आंदोलन में हिस्सा लिया था और उन्हें दो वर्ष का कारावास हुआ।
शिक्षक गायत्री साहू, अंजली सोनी, प्रियंका चौरसिया ने कहा कि संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी जी ने पैसा न छूने का प्रण लिया था और इस प्रण का पालन मरते दम तक किया। स्वामी ब्रह्मानंद अपनी पेंशन छात्र छात्राओं के हित में दान कर दिया करते थे। समाज सुधार और शिक्षा के प्रसार के लिए उन्होने अपना जीवन अर्पित कर दिया। वह कहा करते थे मेरी निजी संपत्ति नहीं है, यह तो सब जनता की है। कर्मयोगी शब्द का जीवंत उदाहरण यदि भारत देश में है तो स्वामी ब्रह्मानंद का नाम अग्रिम पंक्ति में लिखा है। इस मौके पर कंचन, राजकुमारी, राना, रितिका चौरसिया आदि समस्त अध्यापक उपस्थित रहे।


