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स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों पर चलकर जीवन जीने का छात्र छात्राओं को दिलाया संकल्प



0 स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में मनाया गया स्वामी जी की जयंती और महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव 

शुभ न्यूज महोबा। स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय महोबा में रविवार को विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की जयंती पर महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम मंें वक्ताओं ने स्वामी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला साथ ही स्वामी जी के बताए गए रास्ते पर चलकर उनके विचारों और सिद्धांतों पर चलकर जीवन जीने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला सहयोजक आईटी के मिथुन खरे रहे।

कार्यक्रम की शुरूआत महाविद्यालय के प्राचार्य डा0 आरिफ राईन के अलावा ने प्रवक्ताओं और कर्मचारियों ने मां सरस्वती और स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यापर्ण किया  और इसके बाद महाविद्यालय के संस्थापक स्व0 अभय सिंह भदौलिया के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के धर्म सममेलन में कहा था कि खुद को कमजोर समझाना सबसे बड़ा पाप है। उनके द्वारा ही भारत की संस्कृति परम्परा और अध्यात्म का दुनिया में पहचान मिली। प्राचार्य ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा के बल पर जानकारी ही नहीं चरित्र का निर्माण होना चाहिए। कहा कि स्वामी विवेकानंद ने ही विश्व को भारत के सांस्कृतिक, पारंपरिक व आध्यात्मिक परिचय और दर्शन कराया और उन्हीं के कारण भारत को विश्व में सम्मान मिला। कहा कि भारत अपनी युवा शक्ति के बलबूते ही समूचे विश्व में अपना डंका बजा रहा है। स्वामी विवेकानंद के दर्शन व सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है बस जरूरत उन्हें जीवन में अपनाने की है। 



प्रवक्ता संतोष शर्मा ने कहा कि स्वामी जी का मूल मंत्र था उठो जाओ और तब तक मत रुको ज तक अपने लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए। कार्यक्रम का संचालन कर रही क्रांति देवी ने कहा कि स्वामी जी ने एक महान संत दार्शनिक और राष्ट्रवादी थे जिन्होंने राष्ट्रीय चेतना जगाई। प्रवक्ता मनोज कुमार ने कहा कि विचार व्यक्त्वि की जननी है व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है इसलिए युवा जागरण अभियान के लिए वेदांत सोसाइटीकी स्थापना की। कार्यक्रम में उपस्थित शिखा महान प्रशांत शुक्ला संदीप खरे आदि ने स्वामी जी के जीवन पर प्रकाश डाला। अंत में प्राचार्य ने सभी अतिथियों का अभाव व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को स्वामी जी के आदर्श पर चलने का संकन्प दिलाया। 



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