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भारतीय संविधान में भारतीय संस्कृति का है जीवन दर्शन : एलसी अनुरागी



शुभ न्यूज महोबा। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 में कहा गया है कि राज्य अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा का प्रयास करेगा जिससे वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को बल मिलेगा। संविधान की प्रसतावना में हम भारत के लोग शब्द से लोकतंत्र का आदर्श स्वतः स्पष्ट होता है। यह भारतीय संस्कृति का जीवन दर्शन है। ऐसे महत्वपूर्ण संविधान को तैयार करने में संविधान सभा को 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे। संविधान में 90 हजार शब्द है इसके निर्माण में 63 लाख 96 हजार 729 रूप्ये का खर्च आया था।
उक्त बात सांई कालेज आफ ऐजुकेशन महोबा के प्राचार्य डा0 एलसी अनुरागी ने कही। उन्होंने बताया कि संविधान निर्माण के समय मूल संविधान में 325 अनुच्छेद 22 भाग और 08 अनुसूचियां थी। यह दुनिया का ऐसा अनोखा संविधान जो भारतीयों के साथ विश्व के नागरिकों को भी मिल जुल कर रहने की प्रेरणा देता है। संविधान में 22 भाग है और प्रत्येक भाग के मुख्य पृष्ठ पर बने चित्र भाईचारा का संदेश देता है। संविधान का भाग एक सिन्धु सभ्यता के चित्र बने है, भाग दो में वैदिक काल के गुरूकुल आश्रम का दिव्य चित्र, 03 में राम की लंका विजय 04 में नति निर्देशक तत्वों वाले पन्नों में श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन के उपदेश देते हुए दर्शाए गए हैं। भाग 05 में महात्मा बुद्ध, 06 में स्वामी महावीर, 07 में सम्राट अशोक, भाग 08 में गुप्तकाल, 09 में विक्रमादित्य, 10 मे नालदा विश्वविद्यालय दर्शाया गया है ।
इसी प्रकार भाग 11 में उड़ीसा का स्थापव्य, 12 में नटराज, 13 में गंगा अवतरण 14 में मुगल कालीन स्थापव्य, भाग 15 में शिवजी और गुरू गोविंद सिंह, भाग 16 में रानी लक्ष्मीबाई, 17 में गांधीजी की दांडी यात्रा, भाग 18 में नोआखली दंगों में शांति मार्च, भाग 19 में नेताजी सुभाषचंद्र, भाग 20 में हिमालय, 21 में रेगिस्तानी क्षेत्र व आखिरी भाग 22 में हिन्द महासागर आदि देश वासियों को मिलजुल कर रहने की शिक्षा देते हैं। डा0 अनुरागी ने कहा कि यदि हमारी जनता एवं जनप्रतिनिधि संविधान का अक्षरशः पालन करें तो भारत स्वर्ग बन जाएगा और सच्चा लोकतंत्र वाला देश बनेगा।



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