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माता पिता की सेवा कर लो, माता पिता है भगवान : अनुरागी



0 समाजसेवी की स्मृति पर काव्य गोष्ठी का किया गया आयोजन
शुभ न्यूज महोबा। वरिष्ठ अधिवक्ता बाबूलाल मिश्रा के आवास पर उनके पिता समाजसेवी स्व0 भगवती प्रसाद की स्मृति पर शुक्रवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें रचनाकारों ने अपनी अपनी रचनाओं के माध्यम से समाजसेवी को याद किया साथ ही उनके आदर्शमय जीवन पर प्रकाश डाला। काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रुप में आचार्य श्रीराम मौजूद रहे तथा संचालन राजबहादुर मिश्रा ने किया।
काव्य गोष्ठी की शुरूआत विदेश विद्यासन ने सरस्वती वंदना माता हंसवाहिनी सुनाते हुए की और इसके बाद उन्होंने रचना पढ़ी कि खेल खेल में खो गओ एक दिन क करन में हीरा रे। गाजल गायक मुशर्रफ ने गजल सुनाई कि ख्वाब बनके रह गई मामा की दोस्ती, आती है याद आज भी माता की दोस्ती। काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि श्रीराम आचार्य ने स्व0 भगवती प्रसाद मिश्र की समाज सेवा पर अग्रणी रहे हैं सदा समाज सेवा हित पंक्तियां प्रस्तुत की। कवि रामप्रकाश पुरवार ने वर्तमान परिस्थिति पर रचना सुनाते हुए कहा कि कैसी भी हो कुर्सी मायने रखती है, सभी तरह के लोगों को ललचाने रखती है।
वीरभूमि महाविद्यालय के पूर्व प्रवक्ता डा0 एलसी अनुरागी ने माता पिता पर रचना सुनाते हुए कहा कि माता पिता के चरणों में बसते चारो धाम है, माता पिता की सेवा कर लो, माता पिता भी है भगवान। उनके द्वारा सुनाई गई रचना को लोगों ने खूब सराहा। पं0 हरीशंकर नायक ने किसी के काम जो आए उसे इंसान कहते है रचना सुनाकर उपस्थित लोगों की तालियां बटोरी। हरनारायण शर्मा ने कहा कि पारस की रचना थी जीवन कर्म आदर्शमय दया धर्म के रुप थे। ब्रजगोपाल शर्मा ने रचना सुनाई कि बिछड़े हुए बंधु इस जग में कभी न वापस आएंगे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे राजबहादुर मिश्रा ने काव्य रचना के माध्यम से भगवती प्रसाद मिश्रा को सुमन अर्पित किए। वरिष्ठ अधिवक्ता बाबूलाल मिश्रा ने अपने पिता के समाज सेवा व आदर्शमय जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। अंत गौरव मिश्रा ने आए हुए अतिथियों, रचनाकारों और कवियो का आभार व्यक्त कर प्रसाद वितरण किया।   


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