0 कवियों ने गुरू गोविंद सिंह पर कविता सुनाई तो वक्तों ने उनके जीवन पर डाला प्रकाश
शुभ न्यूज महोबा। गुरू गोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव से पूर्व शहर के गुरूद्वारा में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कवियों और रचनाकारों ने रचनाओं से वातावरण भक्ति मय बना दिया साथ ही वक्ताओं ने गुरू गोविंद सिंह के जीवन पर प्रकाश डाला। अधिवक्ता रामप्रकाश शुक्ल रचना सुनाते हुए कहा कि वीर थे महान राजनीति के प्रकांड आप, शेर के समान रण कौशल दिखाते थे आप। रामप्रकाश पुरवार ने गुरू ग्रंथ मे रहते भाई सारे जग के धाम रचना प्रस्तुत की।
काव्य गोष्ठी में पूर्व प्रवक्ता एलसी अनुरागी ने गुरु गोविंद प्रणाम तुम्हारे चरणों में सारे तीरथ धाम ग्रंथ गुरू साहब मे रचना सुनाई। बुंदेली कवि कृष्ण मोहन नायक ने पंक्तियां सुनाई कि मैया गूजरी के बेटे बहादुर के गुरू गोविंद सिंह जू भले हैं लछारे तुमरे नांव। वरिष्ठ कवि विदेश विद्यासन ने कहा कि प्रकाश उत्सव गुरू गोविंद सिंह का आव चले गुरू द्वारे। अधिवक्ता बलवीर सोनी ने गुरू गोविंद के आदर्श से सीख लेने वाली रचना सुनाई तो वहीं रामस्वरूप राजपूत की वीर पैदा हुए हैं वतन के लिए रचना को लोगों द्वारा खूब सराहा गया। नेहा चंसौरिया ने कहा कि गुरू ग्रंथ साहिब गुरू गोविंद सिंह को नमन, सिख समाज का अभिनंदन वंदन। आल्हा परिषद के अध्यक्ष शरद कुमार दाऊ तिवारी ने कहा कि गुरू प्रकाश उत्सव पर सका है अभिनंदन अर्पित करता श्री चरणों में श्रद्धा से मैं कोटि सुमन। कवि संतोष पटैरिया ने कहा कि भक्त थे पंथ के, पुत्र से संतक के शत्रु के अंत के, भाल थे गोविंद के।
अधिवक्ता प्रमोद सक्सेना ने पावन पवित्र प्रेम की सरिता रुपी रचना सुनाई। एडवोकेट जितेंद्र आदित्य ने दशमेश जैसा दूजा दानी नहीं देखा रचना प्रस्तुत की। ब्रजगोपाल शर्मा और जेके शिवहरे ने गुरू गोविंद की वीरता पर कविता पढ़ी साथ ही उनके गुरू ग्रंथ को गुरू का दर्जा मिलने पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ही सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया और उन्हें गुरु का दर्जा दिया। उन्होने अन्याय को खत्म करने और धर्म की रक्षा के लिए मुगलों के साथ 14 युद्ध लड़े थे। धर्म की रक्षा करते करते उन्होंने अपने समस्त परिवार का बलिदान दे दिया था। यही कारण है कि उन्हें ’सरबंसदानी’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है पूरे परिवार का दानी। इस मौके पर सरदार बलवंत सिंह, प्रेमचंद्र सोनी, विश्वनाथ त्रिपाठी, रजीत कौर, सरदार मक्खन, जसविंदर सिंह व जसपाल सिंह आदि ने भी गुरू गोविंद सिंह पर आधारित कविताएं सुनाई। गोष्ठी का संचालन कर रहे हरनारायण पारस ने सिखों के सभी दस गुरूओं पर प्रकाश डाला। प्रबंध कमेटी ने आए हुए कवियाओ रचनाकारों का आभार व्यक्त कर लंगर चखाया।


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