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अकीदतमंदों ने धूमधाम से चादर जुलूस निकालकर भेजी ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह



0 चादर जुलूस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पेश की देशभक्ति की मिशाल
मु0 मतीन खां शुभ न्यूज महोबा। हजरत ख्याजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 813वें उर्स में जहां देश के कोने कोने से अजमेर शरीफ की दरगाह पर चादर चढ़ाई जा रही वहीं शहर में चिश्तिया कमेटी द्वारा मंगलवार की रात धूमधाम से चादर जुलूस निकालकर अजमेर के लिए चादर भेजी। चादर जूलूस शहर के परंपरागत मार्गों से निकाला गया, जिसमें सैकड़ों अकीदतमंद शामिल हुए और नारा-ए-तकबीर अल्लाह हू अकबर के नारे बुलंद आवाज में लगाते हुए चल रहे साथ ही डीजे में ख्याजा मोइनुद्दीन चिश्ती की कव्वालियां बज रहीं थे। सुरक्षा क दृष्टि से जुलूस के साथ साथ पुलिस टीम भी चल रही थी।
शहर की चिश्तिया कमेटी के प्रमुख मोहम्मद सलीम और वार्ड सभासद मोनू के नेतृत्व में मोहल्ला कसौरा से ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के उर्स मुबारक पर चादर जुलूस निकाला गया, जो तमराही बाजार, मुख्य बाजार, ऊदल चौक आल्हा चौक, तहसील चौराहा से होते हुए वापस कसौरा पहुंचा। जुलूस दौरान डीजे पर हजरत ख्याजा मोइनुद्दीन चिश्ती की कव्वालियों के साथ साथ नातिया कलाम बज रहे थे, जिसे सुन अकीदमंद मदहोश हो गए। वहीं जुलूस में सैकड़ों की संख्या में शामिल अकीदतमंद बुलंद आवाज में नारा-ए-तकबीर के नारे लगाते चल रहे थे साथ ही अतिशबाजी और रोशनी का भी बेहतरीन नाजारा पेश किया इसके अलावा देश की शान तिरंगा को हाथो से लहराते हुए देशभक्ति की मिशाल पेश करते हुए चल रहे थे।
जुलूस समाप्त होने के बाद हाफिज और मौलानाओं ने छठी की फातिहा पढ़ी और इसके बाद लोगों में तबर्रूख बांटा गया। अकीदतमंदों से चादर को चूमते हुए अपनी मन्नते मानी और इसके बाद चादर को अजमेर शरीफ के लिए रवाना किया गया, जहां पर हजरत ख्याजा मोइनुद्दीन चिश्ती के मजार पर चादर चढाई जाएगी। इस मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर शहर कोतवाली प्रभारी अर्जुन सिंह पुलिस बल के साथ निगरानी करते रहे। मोहम्मद सलीम ने बताया कि यह आयोजन कई सालों से किया जा रहा है और चादर के जरिए ख्वाजा गरीब नवाज के आस्ताने पर हाजरी देकर मुल्क में अमन चैन की दुआ करना है। 



उर्स के मौके पर महफिल ए ख्वाजा का किया गया एहतमाम
हजरत ख्याजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 813वें उर्स के मौके पर शहर की जामा मस्जिद, मदरसा अरबिया हंफिया मगरियपुरा बड़ी व छोटी सुनहरी मस्जिद मकनियापुरा में महफिल ए ख्वाजा का एहतमाम किया गया। महफिल का आगाज तिलावत ए कलाम पाक से हाफिज समीर साहब ने किया। इसके बाद मौलाना हसन ने नात पाक और मनकबत पेश किया साथ ही ख्वाजा साहब की जिंदगी पर रोशनी डाली गई। हाफिज खुर्शीद अकबरी ने ख्वाजा साहब की शान में खिताब फरमाया कि ख्वाजा साहब ने हमेशा मानवता और भाईचारा का पैगाम दिया। कारी फिरोज खान साहब ने कि ख्वाजा साहब सूफी संत बुजुर्ग थे और हर धर्म के मानने वाले उनकी बारगाह में जाकर अपनी मुरादें पाते हैं और मजार पर चादर चढ़ाकर अपनी मोहब्बत का इजहार करते हैं। हर साल भारत सरकार की तरफ से चादर भेजी जाती है, क्योंकि ख्वाजा साहब ने भारत में अमन और शांति का पैगाम देकर लोगों को सच्चाई का सबक सिखाया झूठ शराब लड़ाई और तमाम बुरे कामों से दूर रहने का पैगाम दिया। कहा कि ख्वाजा साहब हमेशा ग़रीबों मजबूर की मदद करने भूखों को खाना खिलाया का पैगाम दिया। ख्वाजा साहब के दरबार में हमेशा लंगर बांटा जाता था और उन्होंने भूखों को खाना खिलाने का हुक्म फरमाया हर साल उनके आस्ताने पर करोड़ों लोग जियारत के लिए जाते हैं। छोटी मस्जिद के आयोजित कार्यक्रम अकबर अंसारी की निगरानी में किया गया। इस मौके पर नईमुर्रमान मास्टर मुबीन महफूज़ हाजी मुटटन लल्लू मुखिया अनीस अंसारी नदीम अंसारी तौफीक खान नसीम अंसारी शामिल रहे। अंत में सलाम और तबर्रूख के साथ कार्यक्रम समाप्त किया गया।




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