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कबीर मन निर्मल भयो जैसे गंगा नीर पीछ पीछे हरि फिरैं....... 0 संत कबीर आश्रम में संत कबीर अमृतवाणी सत्संग का किया गया आयोजन



शुभ न्यूज महोबा। श्रीमद् भागवत गीता के दसवे अध्याय के श्लोक संख्या 25 में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं नदियों में गंगा हूं, यानी जो लोग महाकुम्भ में स्नान करने नहीं जा पाए वे भगवान कृष्ण के नाम का जाप कर स्नान फल प्राप्त कर सकते हैं। यही बात कबीर ने कही कि कबीर मन निर्मल भयो जैसे गंगा नीर पीछ पीछे हरि फिरैं कहैं कबीर कबीर। उक्त विचार साईं कालेज के प्राचार्य एवं समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी ने संत करीब आश्रम में आयोजित संत कबीर अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम में व्यक्त किए।
सत्संग में संगम सिंह चंदेल ने राधा कृष्ण की फाग केसरिया रंग डारे कन्हैया ने केसरिया रंग डारे लाल सुनाकर होली मय वातावरण बना दिया। धीरेंद्र मिश्रा ने फाग जो तुम छैल छला हो जाते रचना सुनाई। आकाशवाणी के कवि विदेश विद्यासन ने स्वरचित फाग ऋतुओं के ऋतुराज बसंत का रंग बसंती रे सुनाई। संगीत शिक्षक त्रिलोक ने भक्ति रचना काहे न रंगाई चुनरी पांच रंग रचना सुनाई। मुरली वादक जगदीश रिछारिया ने कोई मिला दे मोहे पिया से भजन सुनाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
बुंदेली कलाकार लक्ष्मी यादव ने मोहनहमीरी जा यारी न छोड़ो फाग सुनाई। हरीशंकर नायक ने आज ब्रज मे होरी रे रसिया फाग सुनाकर भक्तों को नृत्य करने के लिए मजबूर कर दिया। पूर्व प्रवक्ता कामता प्रसाद चौरसिया ने कबीर का भजन मुखड़ा क्या देखे दर्पन सुनाया। रामऔतार सैन ने भी भर पिचकारी मारी कन्हा ने भीगी राधा की सारी लाल फाग सुनाई। इस मौके पर राधेश्याम पुरवार, चंदन अनुरागी, लखनलाल, सुनीता, पप्पू सैन सहित तमाम लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत समिति प्रमुख द्वारा सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए प्रसाद वितरण कराया। 


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