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आज से होगा पाक ए माह रमजान का प्रारंभ चांद के हुए दीदर रविवार से शुरू रोजे


टीकमगढ़। रमजान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है। रमजान की शुरुआत 2 मार्च यानी रविवार को पहला रोजा होगा बता दें कि रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार साल का नौवां महीना इबादत रोज़ा और नेकियों का महीना माना जाता है। इस्लाम धर्म में इस महीने का बेहद महत्व है। दरअसल इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार साल 610 के नौवें महीने में मोहम्मद साहब को लेयलत उल कद्र के मौके पर पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ था। तभी से मुस्लिम धर्म के लोग इस पूरे महीने अल्लाह के नाम का रोज़ा रखते हैं और 30 रोज़े पूरे होने के बाद महीने के अंत में ईद उल फितर का त्योहार मनाते हैं।सऊदी अरब में रमजान का चांद देखा जा चुका है। अरब में आज यानि 01 मार्च को पहला रोजा है। वहीं भारत में शनिवार को चांद देखे जाने के बाद रविवार 02 मार्च को पहला रोजा रखा जाएगा। महीना पूरा होने के बाद ईद का त्योहार मनाया जाएगा। इस महीने में रोजदार रोजा रखने के साथ ही कुरान की तिलावत और अल्लाह की इबादत करते हैं। रोजे की शुरुआत सुबह सहरी खाकर की जाती है। वहीं शाम को इफ्तार के साथ रोजा खोला जाएगा।


गौरतलब है कि शनिवार को चांद का दीदार होते ही रविवार को खत्म सहरी सुबह 5 बजकर 18 मिनिट से रोजा प्रारंभ होगा जो अफ्तार का वक्त शाम 06 बजकर 21 मिनिट पर रोजा खोला जाएगा। इसी के तहत सोमवार को 05 बजकर 17 मिनिट पर सहरी का वक्त रहेगा व शाम के समय अफ्तार का वक्त 06 बजकर 22 मिनिट पर मुकरर्र किया गया है। वही टीकमगढ़ में आज चांद देखे जाने के बाद 02 मार्च को पहला रोजा रखा जाएगा। महीना पूरा होने के बाद ईद का त्यौहार मनाया जाएगा। इस महीने में रोजदार रोजा रखने के साथ ही कुरान की तिलावत और अल्लाह की इबादत करते हैं। रोजे की शुरू की शुरूआत सुबह सेहरी खाकर की जाती है वहीं शाम को अफ्तार के बाद रोजा खोला जाता है। रमजान का पाक महीना मुस्लिम लोगों के लिए खास होता है। इस माह में जन्नत के दरवाजे खुल जाते है। इस माह में की गई इबादतों का सवाब अन्य माह से दोगुना मिलता है।कुरान ए पाक की तिलावत और पांचों वक्त की नमाज पढ़ने के साथ गरीबों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें क्योंकि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियों का सवाब अल्लाह अपने बंदों को देता है।मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना खाए पिए रोजा रखते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। रमजान के दिनों में जकात यानी दान देना कुरान पढ़ना नमाज पढ़ना आदि कामों से अल्लाह खुश होते हैं और अपने बंदे के तमाम गुनाह माफ कर देते हैं।

टीकमगढ़ में रमजान 2025 सहरी और इफ्तार का समय




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