कबीर आश्रम में संत कबीर अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम का हुआ आयोजन
सत्संग की शुरूआत कबीर वंदना जय कबीर जय कबीर जय गुरू कबीर, दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा से किया गया। इसके बाद कवि विदेश विद्यासन ने स्वरचित भक्ति रचना खेल खेल में खो न जाए, ककरन में हीरा रे सुनकर उपस्थित लोग को भाव विभोर कर दिया। जगदीश रिछारिया ने तूने कभी कृष्ण व कहयो भजन की शानदार प्रस्तुति दी। डा0 संगम सिंह चंदेल और धीरेंद्र मिश्रा ने बुंदेलखंड की महिमा पर ऐसी माटी न भारत के खंड खंड में, जनम दइयो विधाता बुंदेलखंड में रचना सुनाई। वहीं रामलीला कलाकार लक्ष्मी यादव ने बिटिया दे दइयो भगवान करने है कन्यादान स्वरचित रचना प्रस्तुत की। संगीत शिक्षक त्रिलोक ने सुख के सब साथी दुख में न कोय भजन सुनाया।
सत्संग में समिति प्रमुख एवं साईं कालेज के प्राचार्य डा0 एलसी अनुरागी ने कहा कि राम नाम जाप सभी रोगों की दवा है, इसलिए हर क्षण परमात्मा का स्मरण करते रहना चाहिए। उन्होंने कबीर का दोहा सुनाते हुए कहा कि राम राम की लूट है लूटत बने तो लूट अंतकाल पछताएगा, प्राण जाएगे छूट अर्थात् अभी राम नाम की लूट मची है, इसलिए जितना नाम लेना चाहिए, उतना ले लेना चाहिए, नहीं तो समय निकल जाने पर, यानी मर जाने के बाद पछताना पड़ेगा कि मैंने राम भगवान की पूजा क्यों नहीं की। सुखराम स्नेही ने अंखिया हरि दर्शन की प्यासी व पूर्व प्रवक्ता कामता प्रसाद चौरसिया ने तूने कबहूं न राम कहयो भजन सुनाया। इसी प्रकार धीरेंद्र मिश्रा, रामदीन अनुरागी, सुनीता अनुरागी कबीर दर्शन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर रामऔतार सैन, राजाराम चौरसिया, भगवानदास, राधेश्याम लखनलाल आदि मौजू रहे। अंत में समिति प्रमुख द्वारा सभी आए हुए लोगों का आभार व्यक्त करते हुए प्रसाद वितरण किया।

