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संस्कृत एक ऐसी भाषा है जिसमें जो बोला जाता है वही लिखा जाता : डा0 त्रिपाठी


वीरभूमि महाविद्यालय में हिन्दी विभाग के तत्वावधान में आयोजित हुआ व्याख्यान माला कार्यक्रम
शुभ न्यूज महोबा। संस्कृत व्याकरण एवं काव्य शास्त्र को हिंदी में अपने में समाहित कर लिया है रस, छंद, अलंकार, रीति गुण, ध्वनि सिद्धांतों सभी का समावेश हिंदी में हुआ संस्कृत काव्यशास्त्र ने हिंदी भाषा को समृद्ध किया है हिंदी की वैज्ञानिकता संस्कृत भाषा की देन है हिंदी शब्द संपदा के भंडार को संस्कृत भाषा ने पोषण किया है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी भाषा की उन्नति को सब उन्नतियों का मूल कहा है।
उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी के साहित्य विभाग के अध्यक्ष प्रो0 विजय कुमार पांडे ने शनिवार को वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय में हिंदी विभागीय परिषद के तत्वाधान में आयोजित व्याख्यान माला कार्यक्रम में व्यक्त किए। मुख्य अतिथि ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी भाषा की उन्नति को सब उन्नतियों का मूल कहा है। उन्होंने अपनी कविता “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल“ में यह बात कही है। जिसका मतलब है कि किसी भी समाज का विकास अपनी भाषा के विकास के बिना संभव नहीं है, और मातृ भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना भी मुश्किल है।
प्रो0 डा0 उमाशंकर त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी की देवनागरी लिपि वैज्ञानिक है जो की संस्कृति से ली गई है संस्कृत एक ऐसी भाषा है जिसमें जो बोला जाता है वही लिखा जाता है। उक्त कार्यक्रम प्राचार्य एवं क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी लेफ्टि प्रो0 सुशील बाबू के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया तथा संचालन हिंदी विभाग अध्यक्ष डा0 संतोष पांडे ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अर्थशास्त्र विभाग के डा0 अनवर आलम ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डा0 प्रदीप कुमार, फिजिक्स लैब असिस्टेंट शैलेश कुमार तिवारी, डा0 डीके खरे, डा0 सोवित कुमार गुप्ता सहित हिंदी विभाग के छात्र छात्राएं मौजूद रहे।



प्राचार्य एवं क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी लेफ्टि प्रो0 सुशील बाबू के मार्गदर्शन में संस्कृत व्याकरण एवं काव्यशास्त्र का हिंदी भाषा व साहित्य में योगदान विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी के साहित्य विभाग के अध्यक्ष प्रो विजय कुमार पांडेय, प्रो डॉ उमाशंकर त्रिपाठी राजकीय महाविद्यालय चरखारी, डॉ रमाकांत शुक्ला, डॉ चक्रपाणि ओझा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय एवं डॉक्टर संतोष कुमार पांडे प्रभारी हिंदी विभागीय परिषद ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।



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