शुभ न्यूज महोबा। गुरु गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में चैत्र मास की पूर्णिमा पर श्रद्धा भक्ति और राम धुन के साथ ऐतिहासिक गोरखगिरि की पैदल परिक्रमा लगाई। परिक्रमा दौरान भक्त जय श्रीराम, गोरख बाबा की जय करते हुए चल रहे थे। परिक्रमा पूर्ण करने के बाद शिव मंदिर परिसर में एक भजन पूजन के अलावा विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने गोरखगिरि के महत्व पर प्रकाश डाला।
चैत्र मास की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओ ने शिवतांडव मंदिर से परिक्रमा की शुरुआत की जो महावीरन, पठवा के बाल हनुमान, राम जानकी मंदिर कबीर आश्रम, हाजी फीरोज शाह की दरगाह, काली माता, सकरे सन्या, छोटी चंडिका, शनिदेव मंदिर, नागौरिया व काल भैरव होते हुए वापस शिव तांडव पर पहुंचकर समाप्त हुई। परिक्रमा दौरान श्रद्धालु भजन कीर्तन और जय श्रीराम के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे, श्रद्धालुओं में परिक्रमा दौरान विशेष उत्साह नजर आया। शिव मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने माथा टेंका और संसारिक मोह माया से दूर रहकर आत्म शांति और देश की तरक्की, सुख शांति के लिए प्रार्थनाएं भी की। परिक्रमा के बाद आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी ने कहा कि गोरखगिरि की परिक्रमा के पुन्य फल से सभी मनोकमनाओं की पूर्ति होती है। आज हनुमान जयंती होने पर उन्होंने हनुमान सम नहिं बड़भागी, नहिं काऊ राम चरन अनुरागी चौपाई की व्याख्या की।
समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी ने कहा कि कलि के युग में ईश्वर की प्राप्ति का सबसे सरल और प्रबल साधन राम नाम का जप है, जिससे इस युग के भव सागर को पार किया जा सकता है। कहा कि भगवान राम सीता व लक्ष्मण चौदह वर्ष के वनवास काल में गोरखगिरि में ठहरे थे, जिसका रामकुड सीता रसोई जीवंत साक्ष्य है। उन्हांने बताया इसी पर्वत पर गुरू गोरखनाथ ने तपस्या की थी और उनके शिष्य दीपक नाथ की सिद्ध चौकी पर्वत के पश्चिमी क्षेत्र में बनी है। पं0 हरिशंकर नायक ने कहा कि कल्याण कार्य में लगे योगियों का इस लोक व परलोक दोनो में कल्याण होता है और भलाई करने वाला बुराई से कभी भी पराजित नहीं होता है। इस मौके पर अधिवक्ता सुनीता अनुरागी, पप्पू सैन, गौरीशंकर कोष्ठा विनोद, बैजनाथ, राकेश चौरसिया, जगदीशचंद्र, मुन्नालाल अनुरागी, ओमप्रकाश साहू, परशुराम अनुरागी, पं0 रज्जू द्विवेदी सहित तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।

