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| एसपी ऑफिस के सामने फांसी लगाती महिलायें... |
छतरपुर। छतरपुर जिले की निष्क्रिय कानून व्यवस्था के चलते सीएम मोहन यादव की भाजपा सरकार पर सवालियां निशान लगा रहे है। इतना ही नहीं अगर इसी तरह गरीबों पर अत्याचार और उनका शोषण होता रहा और जिले की पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी रही तो भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। भाजपा सरकार में इनदिनों छतरपुर जिले की पुलिस कितनी सक्रिय है यह आप इन तस्बीरों को देखकर अंदाजा लगा सकते है।
छतरपुर जिले में महिलाओं भी सुरक्षित नहीं है, पीडि़त महिलायें न्याय न मिलने के कारण आत्महत्या को मजबूर हैं। इसका जीता जागता उदाहरण शुक्रवार को एसपी ऑफिस के सामने देखने को मिला। महिलायें एसपी ऑफिस के सामने लगे पेड़ पर रस्सी डालकर आत्महत्या करने का प्रयास कर रही थी तभी पुलिस ने महिलाओं को देखा और उन्हें जाकर रोका। पीडि़त महिलाओं से जब उनकी समस्या पूछी तो सोना बाई ने बताया कि वह मातगुवां थाना क्षेत्र के चौका गांव की निवासी है। उनकी देवरानी और देवर शंकर अपने पुस्तेनी मकान की साफ सफाई करने के लिए गये थे तभी गांव के ही भगत सिंह का लडक़ा रामजी वहां आया और गाली गलौज करते हुए शंकर के साथ मारपीट कर दी और कहने लगे की घर खाली करके यहां से चले जाओ। मातगुंवा थाने पुलिस ने 04 अप्रैल 2025 को एफआईआर तो दर्ज कर ली लेकिन दबंगों पर कोई कार्यवाही नहीं की। पीडि़त महिला ने बताया कि इसके बाद 8 अप्रैल 2025 को पता चला कि रामजी की शिकायत पर पुलिस ने उल्टी हमारे परिवार के लोगों पर ही रिपोर्ट दर्ज कर दी। तभी से रामजी के द्वारा जान से मारने की धमकी दी जा रही है। परिवार के सभी पुलिस भय के मारे घर से गायब है। बच्चों को घर में रो-रोकर बुरा हाल है। दबंगों के डर से वह गांव में भी नहीं रह पा रहे है। न्याय के लिए भटक भटक कर परेशान हो चुके है। पीडि़त महिलाओं ने कहा कि अब कहीं से उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह एसपी ऑफिस न्याय के लिए आये थे। उन्होंने कहा कि वैसे ही वह दबंगों के भय के मारे डर डर का जी रहे है इसीलिए वह एसपी आफिस के सामने लगे पेड़ पर रस्सी का फंदा डालकर फांसी लगा कर अपनी जान दे रही है। जब उन्हें न्याय ही नहीं मिल रहा और दबंगों उन्हें गांव में घुसने नहीं दे रहे है तो फिर वह जीकर क्या करें। अब देखना यह है कि इस मामले में पुलिस अधीक्षक क्या कार्यवाही करते है या फिर यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में पड़ा रहता है।

