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म.प्र.लेखक संघ का ‘बन्ना का मड़वा’ पर बुन्देली कवि सम्मेलन, म.प्र.लेखक संघ का 325वाँ साहित्यिक भव्य अनुष्ठान हुआ


टीकमगढ़//नगर सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की के बेनर तले एडवोकेट कौशल किशोर भट्ट के निवास में सभागार ‘बन्ना का मड़वा’ थीम पर केन्द्रित बुन्देली कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ बुंदेली कवि प्रभुदयाल श्रीवास्तव ‘पीयूष’ ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ व्यंग्यकार रामगोपाल रैकवार रहे। जबकि सारस्वत अतिथि के रूप में पूर्व डी.पी.सी. प्रकाश चन्द्र नायक एवं जिला संघ संचालक शिरीष बिहारी मिश्रा उपस्थित रहे।

कवि सम्मेलन की शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना कर वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीत पढ़ा-भगवान ने हमको दिया ये जीव मिलकर इसे हँसाना सीखें। हँसकर इसे बिताना सीखें।

साहित्य अकादमी द्वारा छत्रसाल पुरस्कार प्राप्त् कवि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बुंदेली दोहे पढ़े-

बिटियाँ कौ मड़बा गड़ौ, आओ देव गनेस,मंगल कर दो काज सब, हरियौ सबइ कलेस।।

राम सिया के ब्याव के, गाँय औरतें गीत,नेग सबइ मड़वा तरै, हौके राखत प्रीत।।

गोविन्द्र सिंह गिदवाहा ने रचना पढ़ी -फेसबुक लाइक,इस्आ इन साइड,

 मैसेंजर टाइट,व्हाट्सएप राइट। है सबका बाॅस, ये एंड्राइड फोन,फोन, फोन,फोन।।

रामगोपाल रैकवार ने रचना पढ़ी- मांइ भौजी बैन सब, रूच-रूच अरु हँस-खेल।

चढ़ा रई आनंद सें, बन्ना हरदी-तेल।।

बन्ना खों हरदी ख्ढ़ी, सोने से भय गात।

मडवा पंगत हो रही,कड़ी बरा उर भात

मीनू गुप्ता ने कविता पढ़ी- ये जिन्दगी ले चल मुझे ऐसी जगह कहीं, जहाँ खूबसूरती की भाषा अलग हो।

स्वप्निल तिवारी ने कविता सुनायी -हर युग के चहेते हमारे राम, बहुत सरल है,

 क्योंकि शब्दों से परे हैं मेरे राम।।

शायर अनवर खान-सरदार के सपने की वो तस्वीर चाहिए,थोड़ी नहीं पूरी हमें जागीर चाहिए।

मां भरती के सर पे सजा था जो एक मुकुट, आजादी के पहले का वो कश्मीर चाहिए।।

शकील खान ने ग़ज़ल पढ़ी-एक आँसू भी हरगिज बहाना नहीं। अपने दिल को कभी तुम दुखाना नहीं।।

कमलेश सेन ने कविता पढ़ी- राम भरोसा राम बल राम है विश्वास।

राम ही अंतर घट रहे राम साँस उचसांस।।

प्रभुदयाल श्रीवास्तव‘पीयूष’ ने रचना पढ़ी- बांके की बांकी चितवन में, भइँ जारइँ चित वन में।

बातन की सुद भूल चुकीं हैं,छलिया की बातन में।।

इनके आलावा रामसहाय राय (रामगढ़), एडवोकेट कौशल किशोर भट्ट, महेन्द्र जैन, आशुतोष भट्ट, विजय मेहरा, अजीत श्रीवास्तव,गुलाब सिंह यादव आदि अपनी रचनाएँ एवं विचार रखे। सभी कवियों ने एडवोकेट कौशल किशोर भट्ट केे पुत्र अनुज भट्ट को विवाह की अंग्रिम शुभकामनाएँ व हार्दिक बधाईयाँ दी। गोष्ठी का संचालन प्रमोद गुप्ता ‘मृदुल’ ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन आशुतोष भट्ट ने किया।


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