0 कबीर आश्रम में आयोजित सत्संग कार्यक्रम सुनाए गए कबीरी दोहे व भजन
शुभ न्यूज महोबा। शहर के मोहल्ला कटकुलवा पुरा स्थित कबीर आश्रम में रविवार को सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी शुरूआत कबीर वंदना जय कबीर जय कबीर जय गुरू कबीरा के साथ हुई, इसके बाद कबीर भक्तों ने दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा भजन सुनाया। सत्संग में कबीरी दोहों के अलावा श्रीमद् भागवत गीता के श्लोक का अर्थ सहित वर्णन किया गया साथ ही मनुष्य को वृद्धों गरीबों की सेवा कर अपने कर्तव्य का पालन करने की अपील भी की गई।
समिति के प्रमुख व साईं डिग्री कालेज के प्राचार्य डा0 एलसी अनुरागी ने कहा कि न कोई कार्य छोटा है और न ही बड़ा, कर्तव्य पालन सबसे बड़ा कार्य होता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय दो के श्लोक संख्या 47 सुनाते हुए कहा कि मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत॥ यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ अर्थात मनुष्य केवल अपना कर्तव्य पालन करे, फल की इच्छा न करे, सभी को अपनी क्षमतानुसार गरीबों, असहायों, वृद्धो की सेवा कर कर्तव्य निभाना चाहिए। बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के गायक इंद्रजीत सिंह ने करम गति टारै नाहिं टरी ॥मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी, सिधि के लगन धरि । सीता हरन मरन दसरथ को, बनमें बिपति परी कबीरी भजन सुनाया।
संगीत शिक्षक त्रिलोक ने काहे न रंगाई चदरिया पांच रंग में भजन प्रस्तुत किया तो वहीं लक्ष्मी यादव ने बुंदेली भजन जरूअन खां अब जरन दो मन में खटका न करियो सुनाया। पं0 हरिशंकर नायक ने समाजवाद लाने के लिए साईं इतना दीजै जामें कुटुम्ब समाय। मैं भी भूखा न रहूं साधु न पवित्र हो जाती है आपक दर्शन से हमारी आत्मा भजन प्रस्तुत किया। मदन पाल राठौर ने कबीर मन निर्मल भयो जैसे गंगा नीर की व्याख्या की। अधिवक्ता सुनीता ने कहा कि सत्यवाणी से बढ़कर कोई पूजा पाठ यज्ञ जप टप नहीं है साथ ही उन्होंने सांच बराबर पत नहीं झूठ बराबर पाप की व्याख्या की। सत्संग में कामता चौरसिया, पप्पू सैन, लखनलाल, नारायणदास, हरिश्चंद्र वर्मा आदि लोग मौजूद रहे।

