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अपनी सोच को नियंत्रित कर मंजिल पाने वाला व्यक्ति होता है सच्चा विजेता : गोस्वामी



0 बुद्ध जयंती व गोरखनाथ जयंती पर श्रद्धालुओं ने राम धुन के साथ लगाई गोरखगिरि परिक्रमा
शुभ न्यूज महोबा। गुरु गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में सोमवार को बुद्ध जयंती व गुरू गोरखनाथ जयंती के अवसर पर श्रद्धा भक्ति और राम धुन के साथ ऐतिहासिक गोरखगिरि की श्रद्धालुओं द्वारा पैदल परिक्रमा लगाई। परिक्रमा दौरान भक्त जय श्रीरामए गोरख बाबा की जय करते हुए चल रहे थे। श्रद्धालुओं द्वारा देश में सुख शांति आपसी भाईचारा कायम रखने के लिए मार्ग पर पड़ने वाले ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर प्रार्थना भी की गई। परिक्रमा पूर्ण करने के बाद शिव मंदिर परिसर सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गयाए जिसमें वक्ताओं ने वैशाख पूर्णिमा के दिन पड़ने वाली बुद्ध जयंती के अलावा गोरखगिरि के महत्व पर प्रकाश डाला।
श्रद्धालुओं द्वारा गोरखगिरि परिक्रमा सोमवार को प्रातः छह बजे शिवतांडव स्थित शिव मंदिर से प्रारम्भ की गई, जो महावीरन, पठवा के बाल हनुमान, राम जानकी मंदिर कबीर आश्रम, हाजी फीरोज शाह की दरगाह, काली माता, सकरे सन्या, छोटी चंडिका, शनिदेव मंदिर, नागौरिया व काल भैरव होते हुए वापस शिव तांडव पर पहुंचकर समाप्त हुई। परिक्रमा दौरान श्रद्धालु भजन कीर्तन और जय श्रीराम के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे, श्रद्धालुओं में परिक्रमा दौरान विशेष उत्साह नजर आया। शिव मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने माथा टेंका और देश में सुख शांति, आपसी भाईचारा, संसारिक मोह माया से दूर रहकर आत्म शांति के लिए प्रार्थनाएं भी की। परिक्रमा के बाद आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी ने बुद्ध जयंती व गुरूगोरखनाथ की जयंती के अवसर पर महात्मा बुद्ध के शांति के विचारों को अमल में लाने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि महात्मा बुद्ध ने कहा था कि अपनी सोच को नियंत्रित कर पाने वाला व्यक्ति ही सच्चा विजेता है, हर एक चीज अस्थायी हैं, इसलिए उनसे चिपकना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें जाने देना चाहिए और उससे सीखना चाहिए। आपके भीतर जो शांति है, वही वो कुंजी है जिससे बाहरी दुनिया में शांति लाई जा सकती है और जो मनुष्य किसी को क्षमा कर दें वह सबसे बड़ा विजेता है। समिति प्रमुख एवं साईं डिग्री कालेज के प्राचार्य डा0 एलसी अनुरागी ने भगवान राम के चौदह वर्ष वनवास काल के दौरान गोरखगिरि में जप तप करनेकी महिमा पर स्वरचित पंक्तियां सुनाई कि पुन्य भूमि महोबा के चंदेलन की मत्था टेको न करो देर एक पल की, गुरू गोरखनाथ यहां तपक रने आए शिष्य दीपकनाथ उनके आदर्श अपनाए। मिलकै जय बोलो महोवे के शिवतांडव की। सत्संग में पं0 हरिशंकर नायक ने श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक की व्याख्या की तो अधिवक्ता सुनीता अनुरागी ने भगवान राम के आदर्श चरित्र वाले श्लोक सुनाए। इस मौके पर रज्जन द्विवेदी, गौरीशंकर कोष्ठा, परशुराम अनुरागी, ओमप्रकाश साहू, विनोद सोनी, पप्पू सैन, चंद्रभान श्रीवास आदि मौजूद रहे।




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