0 प्रसिद्ध कवि संत कबीर की जयंती पर विशेष
शुभ न्यूज महोबा। कबीर जयंती जिसे कबीर प्रकट दिवस भी कहा जाता है, प्रसिद्ध कवि और संत कबीर के जन्मदिवस को मनाने के लिए मनाई जाती है। यह हर साल ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को, जो मई या जून में पड़ती है, मनाई जाती है और इस साल कबीर जयंती 11 जून को मनाई पड़ेगी। इस दिन कबीर के अनुयायी उनकी कविताओं का पाठ करते हैं, सत्संग करते हैं, और उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं।
उक्त विचार साईं डिग्री कालेज के प्राचार्य एवं कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के सचिव डा0 एलसी अनुरागी ने एक वार्ता दौरान व्यक्त किए। प्राचार्य ने कहा कि संत सम्राट कबीर सतयुग में सत्य नाम से, त्रेता में मुनीन्द्र, द्वापर में करुणामयी व कलियुग में कबीर नाम से जाने गए। विश्व के 32 से भी अधिक देशों में कबीर पर शोध हो रहे हैं, लेकिन कबीर का ज्ञान इतना गहरा है कि उनकी आधी साखी में चारो वेदों का निचोड़ है। कबीर की साखी इस प्रकार “बलिहारी वा दूध कीजामें निकसे धीव, आधी साखी कबीर की चार वेद का जीव” गहराई से देखने में पता चलता है कि उनकी आधी से आधी साखी सांच बराबर तप नहीं में भी चारो वेदों का निचोड़ है। कबीर के अनुसार यदि मनुष्य सत्य वचन का आचरण कर ले तो वह भव से पार हो सकता है, लेकिन इसके लिए सच्चे गुरू की आवश्यकता है। बताया कि तीन लोक नौ खंड इक्कीस ब्रह्यांडों में गुरू की ही सत्ता व्याप्त है।
कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के सचिव ने बताया कि कबीर मनुष्योंको चेतावनी देते हुए कहते है कि गुरू से किसी भी स्थिति में रुखा व्यवहार नहीं करना चाहिए, क्योंकि ईश्वर रुठ जाए तो गुरू ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं, लेकिन अगर गुरू ही रुठ जाए तो ईश्वर को प्राप्त नहीं किया जा सकता। कहा कि गुरू की जितनी प्रशंसा की जाय कम है। बताया कि चाहे सारी धरती को कागज बना लिया जाए, विश्व के सभी जंगलों की लकड़ी काटकर कलम बना ली जाए और सातो समुद्र की स्याहीबनाकर गुरू गुण लिखे जाए तब भी नहीं लिख सकते। कबीर के शब्दों में सब धरती कागद करुं लेखनि सब बनराय, सात समुद्र की मसि करुं गुरू गुण लिखा न जाये। इसलिए गुरू को भगवान से पहले प्रमाण करना चाहिए।
विश्व के 32 से अधिक देशों में कबीर पर किया जा रहा शोध : डा0 एलसी अनुरागी
June 10, 2025
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