टीकमगढ़। नगर सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 326वीं कवि गोष्ठी ‘आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़’ में ‘पर्यावरण’ पर केन्द्रित आयोजित की गयी है। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता बुंदेली के वरिष्ठ कवि प्रभुदयाल श्रीवास्तव ‘पीयूष (टीकमगढ़) ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्री युदकुल नंदन खरे (बल्देवगढ़) एवं विषिष्ट अतिथि के रूप में कवि श्री रामसहाय राय (लार खुर्द) रहे।
गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती पूजन दीप प्रज्ज्वलन के बाद वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती बंदना कर यह रचना पढ़ी- चलो करे हम वृक्षारोपण हो समस्या का हल।
पर्यावरण संतुलन बिगड़ा तो जीना होगा मुश्किल।
प्रमोद मिश्रा (बल्देवगढ़) ने पढ़ा- बिरछन से पल रई संसारी रे, कोऊ बिरछा नई काटो।
ये भइया कोऊ बिरछा नई काटो।।
रामसहाय राय (रामगढ़) ने कविता पढी- संसार के सभी ऋषि मुनियों की घड़कन,
ईश्वर ने भारत की मातृ भूमि ही चुनी।।
युदुकुल नंदन खरे (बल्देवगढ़) ने पढ़ा- रहो इस तरह से रहो, चलो इस तरह से चलो
किन्तु इधर उधर मत देखो।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने व्यंग्य रचना पढ़ी-वृक्षारोपण की प्रथा होती है हर बार।
कागज पर ही लग गए,पौधे कई हज़ार।।
महानगर बनने लगे अब तो सारे गाँव।।
ढ़ूँढे से मिलती नहीं वृक्षों की अब छाँव।।
हरबल सिंह लोधी (अस्तौन) ने पढ़ा -पालिथिन को उपयोग दौड़ो भैया,दूषित हो रई गंगा मैया।
एस.आर.‘सरल’ने पढ़ा-स्वस्थ्य रहे पर्यावरण,ऐसे करिये काम।ज्यादा पेड़ लगाइये,देते सुख आराम।
विशाल कड़ा’ ने पढ़ा- शुद्ध और स्वच्छ रखो वातावरण, जौ है पर्यावरण जो है पर्यावरण।।
कमलेश सेन ने पढ़ा -ब्याव की गारी और जीजा की सारी की बातई अलग है।
अनवर खान ‘साहिल’ने ग़ज़ल कही- रह गये आज नाम के जंगल। कट गए सब बड़े-बड़े जंगल।
प्रमोद गुप्ता ’मृदुल’ ने रचना- जनजन को समझाउने, पर्यावरण खां बचाउने।
प्रभुदयाल श्रीवास्तव‘पीयूष’ ने रचना पढ़ी - जै तन रै गव इतै, मन विचरत ब्रज बीच।
जितै किशोरी कृष्ण पै, केशर रईं उलीच।।
गोष्ठी का संचालन कमलेश सेन ने किया तथा आभार अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने माना।


