0 मोहर्रम की 12 तरीख को कीरत सागर तट में लगे बीवियों के मेले का महिलाओं और बच्चों ने उठाया आनंद
शहर के कीरत सागर तट और ईदगाह करियापठवा में मोहर्रम की बारह तारीख को बीबियों का मेला लगाए जाने की परम्परा आज भी कायमा है। मंगलवार को इस मेले में शहर की महिलाओं ने बड़े तादाद में पहुंचकर शिरकत की। ईदगाह के पहाड़ पर बने कुए में महिलाओं ने शक्कर की पुड़िया डालकर मन्नते मानी और इसके बाद कीरत सागर तट पर दिन भर मेला का आनंद साथ ही मान्यता अनुसार महिलाओं ने दही चावल खाया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन द्वारा ईदगाह और कीरत सागर पर पुलिस जवानों को लगाया गया।
बीवियों का मेला सुबह दस बजे से नगर की महिलाओं का करिया पठवा की तरफ जाना शुरू हुआ और यहां पहुंच कर महिलाओं द्वारा मन्नत मांगने के खातिर करिया पठवा पहाड़ पर स्थित कुए में शक्कर से भरी पुड़ियां डाली गई। लोगों की मान्यता कि कुए में शक्कर की पुड़ियां डालने पर यदि पुड़िया डूब जाती है तो मन्नत मांगने वालों की मन्नत पूरी हो जाती है। इसलिए मन्नत पूरी होने के लिऐ महिलाओं द्वारा सारा दिन कुए में पुडिया डालने की रस्म अदा की जाती रही।
पुड़ियों के डूब जाने से महिलाओं के चेहरे खुशी नजर आई तो वहीं पुड़िया न डूबने पर महिलाएं मासूस भी रही। महिलाओं द्वारा ईदगाह स्थित हुजरे में दही चावल पर बीबियों की फातिहा दिलायी और दुआ और मन्नते मानी। फातिहा के बाद सभी ने दही चावल खाया और अन्य महिलाओं के तबर्रूख भी वितरित किया गया।
करियापठवा के बाद महिलाओं ने कीरत सागर तट पर लगे मेले की तरफ रुख किया और जमकर मेले का आनंद लिया। मेले से महिलाओं ने सबसे ज्यादा घरेलू समान की खरीदारी की तो वहीं छोटे छोटे बच्चो ने खिलौने, गुडिया, गुडडे व अन्य समान खरीदने के बाद झूलो का अन्नद लिया। बीविओ के मेले में तमाम दुकानदारो ने बाजार से दुकाने ले जाकर दुकाने लगाई जहां पर सबसे ज्यादा दुकाने खिलौनो गुब्बारो और खानपान की लगी थी। मेले में दुकानदारो की भी खारी बिक्री हुई। तमाम लोगो ने झूले और पलाकियां भी लगाई थी। जिसका महिलाओं और बच्चो ने खूब आन्नद लिया। मेले में आये तमाम लोगो ने कीरत सागर सरोवर का नजारा देखा।
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बीवियो के मेले मे दूर दराज से लोग पहुचते है। मोहर्रम के मौके पर आसपास के जिलो से महोबा के ताजिये देखने के लिये आने वाले लोग भी बीवियों के मेले में पहुचे। कीरत सागर मेला स्थल दूर होने कारण लोग रिक्शो और आटो से मेला स्थल पहुंचे। मेले मे जुटी हजारो की भीड को लाने और ले जाने के लिये ई-रिक्शा और टेम्पो चालको की जमकर कमाई हुई। आटो ईरिक्शा चालक सुबह से शाम तक इधर से उधर अपने वाहन दौड़कर सवारियों को उनके गन्तव्य स्थानों पर पहुंचाते रहे।

