0 गोरखगिरि के सिद्ध बाबा आश्रम में हिन्दी साहित्यकार की जयंती पर आयोजित हुई संगोष्ठी
शुभ न्यूज महोबा। हिन्दी के महान साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती पर उनके प्रशंसकों ने गुरुवार को गोरखगिरि पर्वत के ऊपर स्थित सिद्ध बाबा आश्रम में एक संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें मुंशी जी के महोबा से गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला साथ ही जहां वे रहते थे, उस ग्रांटगंज वार्ड का उनके नाम पर रखने और शहर में उनकी मूर्ति स्थपित मांग उठाई।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का महोबा से गहरा नाता था लेकिन शासन प्रशासन की लापरवाही के चलते धीरे धीरे उनकी सभी निशानियां यहां विलुप्त हो रही हैं। कहा कि हिन्दी साहित्यकार मंशी जी अंग्रेजी हुकूमत के दौरान 1909-1914 तक शहर के ग्रांटगंज वार्ड के जिस मकान में किराए से रहते थे, वह मकान कुछ साल पहले पूरी तरह ढह गया, प्रशासन ने यदि ध्यान दिया होता तो उसे संरक्षित कर संग्रहालय बनाया जा सकता था। प्रेमचंद्र जी सरकारी नौकरी में होने के कारण वे पहले नबाव राय नाम से लिखते थे, लेकिन महोबा आने के बाद ही उन्होंने नबाव राय की जगह मुंशी प्रेमचंद नाम से लिखना शुरू किया। गोदान, गबन, कर्मभूमि, निर्मला, नमक का दरोगा, दो बैलों की जोड़ी व बड़े घर की बेटी जैसी मशहूर रचनाओं से अमर हो चुके उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद शिक्षा विभाग में सब डिप्टी इंस्पेक्टर आफ स्कूल पद पर तैनात थे।
बताया कि उन्होंने यहां जो सोज-ए-वतन पुस्तक लिखी, उससे हमीरपुर के तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर नाराज हो गए और उन्हें दंडित करते हुए लिखने पर प्रतिबंध लगा दिया साथ ही सोज-ए-वतन की प्रतियां भी जलवा दीं। कुछ समय रुकने के बाद उन्होंने नाम बदलकर मुंशी प्रेमचंद नाम से लिखना शुरू किया और बड़े घर की बेटी कहानी यहीं लिखी। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिलीप जैन ने कहा कि वाराणसी के लमही गांव में 1880 में जन्मे मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपतराय श्रीवास्तव था। महोबा उनके साहित्यिक सफर का सबसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। प्रेमचंद ने 15 उपन्यासों सहित 300 से ज्यादा रचनाएं लिखी। उनकी रचनाओं से प्रभावित होकर बंगाल के मशहूर साहित्यकार शरदचंद्र चट्टोपाध्याय ने मुंशी प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट की उपाधि प्रदान की थी। इस मौके पर डा. देवेन्द्र पुरवार, अवधेश गुप्ता, मनीष जैदका, जागेश्वर सोनी, अन्नू पुरवार, पुजारी रामदास त्यागी, निखिल गुप्ता, मोनू, गया प्रसाद, प्रेम चौरसिया, सिद्ध गोपाल सेन व ललित समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
मुंशी प्रेमचंद्र ने महोबा में रहकर लिखी थी सोज-ए-वतन पुस्तक : पाटकर
July 31, 2025
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