0 एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रमों के प्रथम दिन स्थानीय व बाहरी कलाकारों ने बांधी शमा
शुभ न्यूज महोबा। संरक्षण एवं विकास समिति महोबा द्वारा ऐतिहासिक कजली मेले बनाए गए सांस्कृतिक मंच सात दिनो तक होने वाले कार्यक्रमों का बीती रात्रि भव्य उद्घाटन हुआ। कार्यक्रमों का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष जेपी अनुरागी और जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने संयुक्त रूप दीप प्रज्जवलित कर किया। देर रात तक चले समारोह में पुलिस अधीक्षक प्रबल प्रताप सिंह सहित जिले के कई अधिकारी उपस्थित रहे। नगर पालिका अध्यक्ष ने अतिथियों का स्वागत कर उन्हें प्रतिमाएं भेंट कीं।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम संत जोसेफ स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा माँ चंद्रिका की वंदना हुई, इसके बाद लोक गायिका संगीता तिवारी ने पारंपरिक लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति दी। उमाशंकर सेन और बृजेंद्र कुमार के आल्हा गायन ने बुंदेलखंड की वीरता की झलक दिखाई। संगीताचार्य अबोध सोनी और उनकी टीम ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी महफिल में चार चांद लगाए। कीरत सागर मेला स्थल पर बनाए गए सांस्कृतिक मंच के रात्रि कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लखनऊ की टीम ज्ञानेश्वर ज्ञानी द्वारा प्रस्तुत नाट्य कृति “मन मन में राम“ रहा, जिसमें राम, लक्ष्मण और सीता के वनवास के दौरान केवट से मिलने की कथा मंचित की गई। केवट द्वारा अपने व्यवसाय की नैतिकता और कर्तव्यपरायणता दिखाते हुए प्रभु राम के चरण धोने का प्रसंग दर्शाया गया। नाटक में आशीष सिंह, गुलशन यादव, संदीप देव, विशाल श्रीवास्तव, प्रियंका भारती और निरुपमा राहुल ने उत्कृष्ट अभिनय किया। केवट संवाद की प्रभावशाली प्रस्तुति देख दर्शक भी तालिया बजाने को मजबूर हो गए।
कजली मेले के अवसर पर एक सप्ताह तक चलने वाले रात्रि कार्यक्रमों में सरिता यादव की टीम ने लोक गीत “पिया मेहदी लिया दे मोतीझील से जाके साइकिल से.. की प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया। टीम द्वारा लोक नृत्य की भी प्रस्तुति दी गई। रात्रि कार्यक्रमों में उमाशंकर सेन, बृजेंद्र कुमार, परशुराम, अनुज सिंह ने भी आल्हा गायन से दर्शकों का मन मोह लिया तो वहीं लोक गायन संगीता तिवारी, संतोष चौरसिया और उमाशंकर सेन भी ने अपनी आवाज से दर्शकों को बांधे रखा। सांस्कृतिक मंच ने बुंदेलखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। कार्यक्रम देर रात तक चला और सभी उपस्थित लोगों ने इसका आनंद लिया। कजली मेला महोबा की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने और स्थानीय कला को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण आयोजन है।
