0 शहर के साथ साथ ग्रामीण अंचलों में भी दुकानदारों ने लगाई अस्थाई राखियों की दुकानें
शुभ न्यूज महोबा। भाई बहन के अटूट स्नेह और पवित्र बंधन का त्योहार रक्षाबंधन ज्यों-ज्यों नजदीक आता जा रहा है, त्यों-त्यों बाजार में रौनक बढ़ती जा रही है। शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी दुकानदारों ने राखी की अस्थाई दुकानें सजाकर तैयार कर ली है। जिले में 9 अगस्त को भाई बहन का पवित्र त्योहार रक्षा बंधन मनाया जाएगा। रंग बिरंगी और एक से एक खूबसूरत राखियां इस दफा बाजार में नजर आ रही है और बहने अपनी भाई की कलाई में बांधने के लिए अभी से राखियांं की खरीददारी शुरु कर दी है। पर्व के मद्देनजर बाजार में लोगों की चहल पहल बढ़ गई है।
गौरतलब है कि रक्षाबंधन त्योहर आते ही शहर में राखियों का बाजार गर्म हो गया है। जगह जगह दुकानदारों ने राखियों की दुकान सजा ली है। खनगा बाजार, मैन बाजार सहित कई स्थानों पर दुकानदारों ने राखियों की दुकानें सजा ली है, वहीं कुछ लोगों ने शहर के अन्य चौराहो पर भी अस्थाई राखी की दुकानें लगाकर बिक्री शुरू कर दी है। ज्यादातर दुकानदारों ने अपनी अपनी दुकानों के आगे काउंटर लगाकर राखी की दुकानें तैयार की है, जिससे आज कल बाजार में जगह जगह रंग बिरंगी राखियां नजर आ रही है। बहनें रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई से जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन लेती हैं
जिले में रक्षाबंधन त्योहार के मौके पर राखी की अच्छी खासी बिक्री होती है। कारण, महोबा में रक्षाबंधन के त्योहार पर कजली मेले को देखने की वर्षों पुरानी चली आ रही परम्परा के मुताबिक आज भी यहां की बहने रक्षाबंधन में अपने मायके जरुर आती है, जिसके चलते यहां पर राखी की कुछ ज्यादा ही बिक्री होती है। रक्षाबंधन त्योहार में भाई बहन का अटूट प्यार भी देखने को मिलता है। इसी गरज से बहने अपने भाइयों के लिए कीमती से कीमती राखियां लेकर आती हैं और भाई भी राखी बंधवाने के लिए बाद स्नेह पूर्वक भेट देने में कोई कंजूसी नहीं दिखाते हैं। रक्षाबंधन का त्योहार जिले में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। दुकानदारों का कहना है विभिन्न रंग रूप और आकार वाली राखी उपलब्ध हैं और सभी राखियां स्वदेशी हैं, इसके साथ ही तिरंगा राखी भी लोगों को काफी पसंद आ रही हैं।
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दूसरे दिन मनाया जाता महोबा में रक्षाबंधन पर्व
भारत देश में रक्षाबंधन का त्योहार एक दिन एक साथ मनाया जाता है, लेकिन महोबा में रक्षाबंधन त्योहार अन्य जिलों के अपेक्षा कुछ जुदा है। कारण, 843 साल पहले रानी मलहना और राजकुमारी चंद्रावली डोले पर सवार होकर जब रक्षाबंधन के दिन कीरत सागर में कजरियां भुजरियां विसर्जित करने जा रहीं थी, तभी दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान की सेना ने रानी मलहना और चंद्रावली के डोले को घेर लिया, जिसके चलते कीरत सागर तट पर चंदेल शासक राजा परमाल और पृथ्वीराज चौहान की सेना के बीच युद्ध छिड़ गया था। युद्ध छिड जाने के कारण उस दिन नहीं मना सके थे। अगले दिन रक्षाबंधन का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिसके चलते आज भी रक्षाबंधन के दूसरे दिन त्योहार को मनाए जाने की परम्परा कायम है।
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बहनों को उपहार देने के लिए भाई कर रहे आनलाइन शापिंग
इस साल रक्षाबंधन पर भाईयों द्वारा बहनों को दिए जाने वाले उपहार बाजार से न खरीदकर बहनो की पसंद से आनलाइन आर्डर किए जा रहे हैं, जिसके चलते पर्व से पूर्व ही आर्डर किए गए सामान को डिलीवरी बॉय लेकर घर घर पहुंच रहे हैं। कुछ भाई अपनी बहनों को पहले से ही उपहार भेंट कर रहे है तो कुछ भाई रक्षाबंधन पर्व पर सामान देने के लिए उसे छिपाकर रख दिए हैं। इस दफा रक्षाबंधन में अधिक आनलाइन शापिंग के चलते डिलीवरी बॉय को अधिक मेहनत करना पड़ रही है और सुबह से शाम तक अपने ग्राहकों का आर्डर उनको फोन करके घर तक पहुंचा रहे हैं।

