टीकमगढ़। शहर के सभी 18 जिनालयों पर्युषण पर्व बड़े ही हर्षोल्लास एवं धार्मिक कार्यक्रम के बीच मनाए जा रहे हैं। प्रातः 6.30 बजे से ही श्रद्धालुओं का मंदिर में पहुंचना प्रारंभ हो जाता है। भाद्रपद एकादशी बुधवार को प्रातः 6.45 बजे से मंगलाष्टक 7.45 बजे श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। पर्युषण पर्व का आज सातवां दिन तप धर्म के साथ मनाया गया। गुरुवार को आठवां दिन त्याग धर्म के रूप में मनाया जाएगा। जैनआगम में बतलाया गया कि त्याग धर्म के दिन दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। आदिनाथ धाम में सामूहिक पूजन शिविर का आयोजन नंदीश्वर मंदिर कमेटी द्वारा किया जा रहा है। पूजन शिविर में पंडित सुनील शास्त्री एवं राजेश शास्त्री का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। संगीत की सुर लहरी देवेंद्र जैन लार द्वारा बिखेरी जा रही है। 8.30 बजे से विनय पाठ के साथ पूजन प्रारंभ हुई। सुनील शास्त्री ने पर्यूषण पर्व के सातवे दिन तप धर्म के विषय में बतलाया कि तप का अर्थ सिर्फ उपवास से जोड़ना नहीं है उत्तम तप धर्म हमें सिर्फ भोजन का त्याग करना नहीं सिखाता। बाहरी उपवास तभी सफल है जब भीतर का आत्मिक उपवास हो। केवल आहार में नहीं विचार में भी संयम लाये यही तप हमें आत्मा का असली दर्शन करता है। श्री शास्त्री ने कहा कि पांच इन्द्रियों के विषयों के भोगने का तथा क्रोध आदि कषाय भावों के त्याग के साथ जो आठ पहर के लिये सब प्रकार के भोजन का त्याग किया जाता है उसको अनशन या उपवास कहते हैं। श्री शास्त्री ने कहा कि उपवास के लिये घर, व्यापार के कार्यों का त्याग, पाँचों इन्द्रियों के विषयों का त्याग तथा क्रोधादि कषाय-कलुषित भावों का त्याग होना आवश्यक है, यानी-उस दिन अपने परिणाम शांत नियंत्रित रखें और सामायिक, स्वाध्याय आदि धर्म साधन के कार्य करते रहे, कोई सांसारिक कार्य न करे। यदि विषय और कषाय का त्याग न किया जाये तो वह उपवास नहीं है, वह तो केवल लंघन समझना चाहिए। शास्त्री जी ने बतलाया कि भोजन शरीर की स्थिति बनाये रखने के लिये किया जाता है, इसके लिये भोजन यदि भूख से कुछ कम किया जावे तो उससे शरीर मे स्फूर्ति रहती है, सुस्ती नहीं आती। यही तप धर्म का असली स्वरूप है। प्रेस को यह तमाम जानकारी प्रदीप जैन बम्होरी वालों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रेस को व्हाट्सएप के माध्यम से दी है।
पर्यूषण पर्व सातवां दिन,उत्तम तप धर्म, आत्म शुद्धि के लिये इच्छाओं को रोकना तप है,केवल आहार में नहीं विचार में भी संयम लाये
September 03, 2025
टीकमगढ़। शहर के सभी 18 जिनालयों पर्युषण पर्व बड़े ही हर्षोल्लास एवं धार्मिक कार्यक्रम के बीच मनाए जा रहे हैं। प्रातः 6.30 बजे से ही श्रद्धालुओं का मंदिर में पहुंचना प्रारंभ हो जाता है। भाद्रपद एकादशी बुधवार को प्रातः 6.45 बजे से मंगलाष्टक 7.45 बजे श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। पर्युषण पर्व का आज सातवां दिन तप धर्म के साथ मनाया गया। गुरुवार को आठवां दिन त्याग धर्म के रूप में मनाया जाएगा। जैनआगम में बतलाया गया कि त्याग धर्म के दिन दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। आदिनाथ धाम में सामूहिक पूजन शिविर का आयोजन नंदीश्वर मंदिर कमेटी द्वारा किया जा रहा है। पूजन शिविर में पंडित सुनील शास्त्री एवं राजेश शास्त्री का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। संगीत की सुर लहरी देवेंद्र जैन लार द्वारा बिखेरी जा रही है। 8.30 बजे से विनय पाठ के साथ पूजन प्रारंभ हुई। सुनील शास्त्री ने पर्यूषण पर्व के सातवे दिन तप धर्म के विषय में बतलाया कि तप का अर्थ सिर्फ उपवास से जोड़ना नहीं है उत्तम तप धर्म हमें सिर्फ भोजन का त्याग करना नहीं सिखाता। बाहरी उपवास तभी सफल है जब भीतर का आत्मिक उपवास हो। केवल आहार में नहीं विचार में भी संयम लाये यही तप हमें आत्मा का असली दर्शन करता है। श्री शास्त्री ने कहा कि पांच इन्द्रियों के विषयों के भोगने का तथा क्रोध आदि कषाय भावों के त्याग के साथ जो आठ पहर के लिये सब प्रकार के भोजन का त्याग किया जाता है उसको अनशन या उपवास कहते हैं। श्री शास्त्री ने कहा कि उपवास के लिये घर, व्यापार के कार्यों का त्याग, पाँचों इन्द्रियों के विषयों का त्याग तथा क्रोधादि कषाय-कलुषित भावों का त्याग होना आवश्यक है, यानी-उस दिन अपने परिणाम शांत नियंत्रित रखें और सामायिक, स्वाध्याय आदि धर्म साधन के कार्य करते रहे, कोई सांसारिक कार्य न करे। यदि विषय और कषाय का त्याग न किया जाये तो वह उपवास नहीं है, वह तो केवल लंघन समझना चाहिए। शास्त्री जी ने बतलाया कि भोजन शरीर की स्थिति बनाये रखने के लिये किया जाता है, इसके लिये भोजन यदि भूख से कुछ कम किया जावे तो उससे शरीर मे स्फूर्ति रहती है, सुस्ती नहीं आती। यही तप धर्म का असली स्वरूप है। प्रेस को यह तमाम जानकारी प्रदीप जैन बम्होरी वालों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रेस को व्हाट्सएप के माध्यम से दी है।
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