टीकमगढ़/देवआस्था पुस्तकालय में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर संयोजक पवनघुवारा ने विज्ञप्ति में बताया कि सभी ने पूज्य बापू जी एवं शास्त्री जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ पुष्पअर्पित किये, जहां पर उपस्थित डॉ.डी. एस. यादव पूर्व प्रचार्य शा.महाविद्यालय पृथ्वीपुर,श्री न्याधीश महेश कुमार झाँ ,अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक अध्यक्ष नगरपालिका,श्री धनश्याम तिवारी वरिष्ठ शिक्षाविद ,श्री बीरेन्द्र चंदसोरिया जी साहित्यकार,श्री एन-डी सोनी बरिष्ठ शिक्षाविद,प्रो.इन्द्रजीत जैन पूर्व प्राचार्य भा. स्नातकोत्तर महाविधालय,श्री सनत जैन पूर्व प्राचार्य,श्री सुभाष चन्द्र वर्मा पूर्व अध्यक्ष लाइन्स क्लब ,सूर्य प्रकाश मिश्रा ,ने अपने अपने विचार व्यक्त किए ,श्री धनश्याम तिवारी वरिष्ठ शिक्षाविद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। उनका असली नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में प्राप्त की और बाद में कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। भारत लौटने के बाद, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक वकील के रूप में काम किया, जहां उन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी और सत्याग्रह का अपना दर्शन विकसित किया।श्री बीरेन्द्र चंदसोरिया जी साहित्यकारने कहा कि महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए असहयोग आंदोलन,सविनय अवज्ञा आंदोलन,भारत छोड़ो आंदोलन,सत्याग्रह को अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध के रूप में परिभाषित किया।अहिंसा के माध्यम से विरोध करने का तरीका अपनाया।गांधीजी के लिए सत्य ही ईश्वर था।प्रो.इन्द्रजीत जैन पूर्व प्राचार्य भा. स्नातकोत्तर महाविधालय ने कहा कि महात्मा गांधी, जिन्हें राष्ट्रपिता के रूप में सम्मानित किया जाता है,महात्मा गांधी का जीवन और दर्शन हमें सिखाता है कि सत्य, अहिंसा और सादगी के माध्यम से हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते है भारत में बल्कि पूरे विश्व में प्रभाव डालते हैं।भारतीय इतिहास में 2अक्टूबर महत्वपूर्ण दिन है जहां उपस्थित श्री डॉ.डी. एस. यादव पूर्व प्रचार्य शा.महाविद्यालय पृथ्वीपुर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के दूसरे प्रधानमंत्री मा.लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा वाराणसी और इलाहाबाद में प्राप्त की।लाल बहादुर शास्त्री का जीवन और कार्य हमें सिखाता है कि सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति के साथ हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देश का नेतृत्व किया और देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए।हरित क्रांति को बढ़ावा दिया, जिससे देश में खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई और देश को खाद्यान्न आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली।शास्त्री जी ने किसानों और जवानों के योगदान को पहचाना और उनका सम्मान किया। उनका नारा "जय जवान जय किसान" आज भी प्रसिद्ध है।मा.लाल बहादुर शास्त्री की विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है। उनके कार्यकाल के दौरान देश के विकास और सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों को हमेशा याद रखा जाएगा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 156 वीं जयंती के पावन अवसर पर देव आस्था पुस्तकालय द्वारा परम सम्माननीय डॉ.डी. एस. यादव पूर्व प्रचार्य शा.महाविद्यालय पृथ्वीपुर,श्री न्याधीश महेश कुमार झाँ ,श्री धनश्याम तिवारी शिक्षाविद ,श्री बीरेन्द्र चंदसोरिया साहित्यकार,श्री एन-डी सोनी, शिक्षाविद,श्री सनत जैन पूर्व प्राचार्य,जनों को शाल से सम्मानित किया , साथ ही उपस्थित अनीस खान ,देवीलाल पार्षद,गिरधारी लाल कबीरपंथी,सुरेश कोरी,अरविन्द हलावनी, दीपचंद प्रकाश नादेल,विद्याधर वरार,वंशी अहिबार,श्रीमती रोहिणी घुवारा,श्रीमती रेशु अभिषेक जैन,गुलाबवाई जैन ,हेमन्त वर्मा,राजकुमार ताम्रकार, आलोक शर्मा, जहां देवआस्था पुस्तकालय में विषेश रूप से सभी में चरखा भी चलाया ,महात्मा गांधी के लिए चरखा एक महत्वपूर्ण प्रतीक था जिसका कई अर्थों में महत्व था:
चरखा गांधी जी के लिए आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक,चरखा स्वदेशी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था,चरखा आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक था। स्वतंत्रता की लड़ाई में मदद की, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर और सादगी पसंद बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देवआस्था पुस्तकालय की अध्यक्ष श्रीमती प्रियंका घुवारा के सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।


