टीकमगढ़// नगर की सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था मध्यप्रदेश लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 330वीं कवि गोष्ठी एवं दशहरा मिलन समारोह आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़ में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ व्यंग्यकार रामगोपाल रैकवार (टीकमगढ़) ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार प्रभुदयाल श्रीवास्तव ‘पीयूष’ (टीकमगढ़) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में गीतकार शोभाराम दांगी ‘इंदु’ (नदनवारा), कवयित्री मीनू गुप्ता, एवं सारस्वत अतिथि के रूप में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष एमामनुएल जान (पलेरा) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके उपरांत कवि वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर गोष्ठी का शुभारंभ किया—
"कितने हैं हम जैसे जग में, कितने राम के जैसे,
पूँछता है रावण हम सबसे, सच बोलो तुम कैसे।"
इसके बाद एक से बढ़कर एक काव्य रचनाएँ प्रस्तुत की गईं। राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने दोहे सुनाए—
"दसरय की जै राम जी, बब्बन खौं सम्मान,
मान खौं परनाम है, सखा खौं चले पान।"
रामगोपाल रैकवार ने कहा—
"राम तुम्हारे बाण में, कहाँ रह गया दोष,
रावण अगणित बढ़ रहे, न सूखा अमृत कोश।"
शोभाराम दांगी ‘इंदु’ ने सामाजिक व्यंग्य से ओतप्रोत पंक्तियाँ पढ़ीं—
"रावण दहन होत हर साले, तोइ रावन बढ़ रय,
अत्याचार अनीती के अब, ई धरती पै गड़रय।"
गोविंद सिंह गिदवाहा (मडाबरा, उ.प्र.) ने प्रकृति के संरक्षण पर रचना सुनाई—
"धरा सिर्फ धरा ही नहीं है हम सबकी प्यारी माँ,
प्रकृति का अभेद सेतु समाहित है सारी दुनियाँ।"
कवयित्री मीनू गुप्ता ने नारी संवेदना से भरी पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं—
"माँ ओ माँ मुझे भी जग में आने दो,
तुम दो कुलों की शान कहती हो न,
फिर क्यों मुझे आने से रोक देती हो।"
एस.आर. ‘सरल’ ने सामाजिक असमानता पर कटाक्ष किया—
"दशहरे पर सिर्फ कागज के पुतले जल रहे हैं,
समाज में न समता, न करूणा और न न्याय है।"
शकील खान ने ग़ज़ल पढ़ी—
"हर आदमी पे मुझे ऐतबार नहीं है,
जहाँ में हर कोई ईमानदार नहीं है।"
वहीं स्वप्निल तिवारी ने श्रद्धा और परंपरा से जुड़ी रचना सुनाई—
"एक बंधन की डोर आस लगाए रंग धानी,
सरयू तट का चंद्र चकोर, जग रीत रघु की जानी।"
मुख्य अतिथि प्रभुदयाल श्रीवास्तव ‘पीयूष’ ने अपनी रचना में दशहरे के भाव को उकेरा—
"दसरय कि हदन देख लो, नीलकंठ उर मीन,
पल में बस बिगरी बनें नईँ हुइए मन हीन।"
डी.पी. यादव ने प्रस्तुत किया—
"प्रभु ने कुल सहित रावन को मारा, सारे पापियों को तारा।"
कार्यक्रम में विजय मेहरा, एमामनुएल जान (पलेरा), नवल सक्सेना (जतारा), रामसेवक साहू (जतारा) एवं अजीत सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कविगोष्ठी का संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया तथा आभार प्रदर्शन संस्था के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ द्वारा किया गया।कार्यक्रम में दशहरे की साहित्यिक गूँज और कवियों की रचनाधर्मिता ने वातावरण को रस, भाव और चिंतन से सराबोर कर दिया।
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