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ब़ज़्में अदब की माहाना नशिस्त में गूंजी शायरी, “सफ़र ज़िन्दगी का बहुत मुख़्तसर है” पर पढ़े गए कलाम


टीकमगढ़ नगर की उर्दू अदब को जीवंत बनाए रखने वाली एकमात्र साहित्यिक संस्था ब़ज़्में अदब की माहाना नशिस्त शहर में शकील खान के दौलतख़ाने पर आयोजित हुई। महफ़िल की सदारत मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार एवं शायर राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने की, जबकि निज़ामत की जिम्मेदारी शायर इक़बाल फ़ज़ा ने निभाई। कार्यक्रम में तयशुदा मिसरा-ए-तरह “सफ़र ज़िन्दगी का बहुत मुख़्तसर है” पर शायरों ने अपने-अपने ख़ूबसूरत कलाम पेश किए।

महफ़िल की शुरुआत बुज़ुर्ग शायर कारी अख़लाक़ साहब के अशआर से हुई —

“वो अहले-ख़िरद हैं, हम अहले-जुनूँ हैं,

मेरी उनसे अनबन इसी बात पर है।”

सदर-ए-महफ़िल राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने अपनी ग़ज़ल में मोहब्बत की नज़ाकत बयान करते हुए कहा —

“मुहब्बत की खुशबू अगर चे उधर है,

मेरे दिल की बेताब हालत इधर है।”

शायर वफ़ा शैदा ने इंसान और ख़ुदा के रिश्ते पर रोशनी डालते हुए पढ़ा —

“गुनाहों से भूला हुआ हर बशर है,

रहे याद रब को मगर सब ख़बर है।”

मेज़बान शकील खान ने नई मंज़िलों और मोहब्बत के एहसास को अपनी ग़ज़ल में यूँ पिरोया —

“मिरे प्यार का पहला-पहला असर सफ़र है,

नई मंज़िलें हैं, नई हर डगर है।”

इक़बाल फ़ज़ा ने अपने अंदाज़ में पेश किया —

“कभी तो ग़ुलामी का समरा मिलेगा,

तिरा आस्ताना है और मेरा सर है।”

चाँद मोहम्मद ‘आख़िर’ ने मोहब्बत और वफ़ा का संदेश देते हुए पढ़ा —

“नफ़रतों की यक़ीनन जलेगी शरर है,

हमारी वफ़ाओं में इतना असर है।”

शायरा सबरा सिद्दीकी ने तसव्वुर की दुनिया को शब्द दिए —

“है सदियों का सामान, न हाल की ख़बर है,

तसव्वुर ऐ नादान तेरा किधर है।”

अनवर साहिल ने पर्यावरण का संदेश देते हुए कहा —

“कई पंछियों का यही एक घर है,

इसे मत गिराओ, पुराना शजर है।”

सलीम खान ने मोहब्बत की राह की नाज़ुकता यूँ बयां की —

“सलीम अपना रखना क़दम देखकर तुम,

ये राह-ए-मुहब्बत बहुत पुरख़तर है।”

शायरा गीतिका वेदिका ने दर्द भरे लहजे में पढ़ा —

“जो बीती है हम पे किसे क्या ख़बर है,

दुआ जो भी की थी हुई बेअसर है।”

युवा शायर जाबिर गुल ने कहा —

“ये तकरार कुछ और ही कह रही है,

मुहब्बत से कह दो मुहब्ब अगर है।”

इसके अलावा पूरन चन्द्र गुप्ता और रविन्द्र यादव ने भी अपने कलाम पेश कर महफ़िल में रंग जमा दिया। पूरी नशिस्त देर रात तक अदबी माहौल, शेर-ओ-शायरी और आपसी मुहब्बत के जज़्बे के साथ जारी रही, जहाँ श्रोताओं ने हर शायर को दिल खोलकर दाद दी।


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