टीकमगढ़। टीकमगढ़ से लगभग 5 किलोमीटर दूर पपौरा जी जैन तीर्थ में आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत भगवान के तप एवं लोककल्याणकारी जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। पूरे आयोजन में भक्ति, आध्यात्मिकता और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ भगवान) द्वारा मानव समाज को दिए गए असि, मसि और कृषि के उपदेशों को विस्तारपूर्वक समझाया गया। उन्होंने बताया कि आदिकाल में जब मानव असंगठित और असभ्य जीवन व्यतीत कर रहा था, तब भगवान ऋषभदेव ने मानवता को सभ्य एवं संगठित जीवन की दिशा प्रदान की और जीवनयापन के तीन प्रमुख आधार—असि, मसि और कृषि—का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने बताया कि असि का अर्थ रक्षा एवं व्यवस्था बनाए रखना है, जिससे समाज में न्याय और सुरक्षा की भावना स्थापित होती है। मसि का अर्थ लेखन, शिक्षा और ज्ञान है, जिससे मनुष्य में विवेक, संस्कृति और सभ्यता का विकास होता है, जबकि कृषि का अर्थ खेती है, जिसके माध्यम से मनुष्य आत्मनिर्भर बनकर अपने जीवन का निर्वाह करता है। प्रवचन में यह भी बताया गया कि भगवान का यह उपदेश केवल उस युग तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज में संतुलन, समृद्धि तथा संस्कारों के विकास का आधार है।
इस अवसर पर पट्टाचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने मानव सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी पीड़ित व्यक्ति की सहायता को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी जरूरतमंद की मदद करने में अपना कोई कार्य या कार्यक्रम विलंबित भी हो जाए, तो उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने दया, करुणा और सेवा को सच्चे धर्म का मूल बताते हुए कहा कि मन, वचन और काया से अहिंसा का पालन आवश्यक है, क्योंकि भाव हिंसा भी कर्मों के बंधन का कारण बनती है।
महोत्सव के अंतर्गत नीलांजना का मनोहारी नृत्य भी प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य के मध्य नीलांजना की अचानक मृत्यु का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को गंभीर और चिंतनशील बना दिया। यह प्रसंग जीवन की क्षणभंगुरता और अनिश्चितता का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया। इस घटना को देखकर आदिकुमार के अंतर्मन में वैराग्य भाव जागृत हुआ और उन्होंने संसार के असार स्वरूप को समझते हुए त्याग और तप का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया।
आदिकुमार के तप हेतु प्रस्थान का दृश्य अत्यंत भावविभोर कर देने वाला रहा। राजसी वैभव और सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण जीवन का त्याग कर जब उन्होंने तप मार्ग को अपनाने का निर्णय लिया, तो पूरा वातावरण भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत हो उठा। संगीत, मंगल ध्वनि और जयकारों के बीच आदिकुमार का भव्य प्रस्थान हुआ, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। यह दृश्य त्याग, संयम और आत्मकल्याण की प्रेरणा देने वाला रहा।
कार्यक्रम में टीकमगढ़ विधायक यादवेंद्र सिंह, पूर्व विधायक अजय यादव एवं पूर्व विधायक राकेश गिरी गोस्वामी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी गिरी के साथ उपस्थित रहे। सभी ने गुरुचरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया और समिति के सदस्यों द्वारा उनका सम्मान किया गया।
अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान ऋषभदेव के उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। संपूर्ण आयोजन धर्ममय एवं आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ सहभागिता की।

