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| मामला आदिवासी की जमीन हड़पने का |
केलाश रेकवार पन्ना। जिले का बहुचर्चित मामला जिसमें आदिवासी महिला की जमीन कूटनीतिपूर्वक दस्तावेज तैयार कर आरोपी श्रीकांत दीक्षित द्वारा जमीन फर्जी तरीके से नामांतरण कर अपने नाम करवा ली। जिसमें लगभग 4 से 5 लोग लिप्त हैं, जिनमें तत्कालीन तहसीलदार बविता राठौर जो वर्तमान में नर्मदापुरम डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं, इसके अलावा 4 अन्य आरोपी मुन्ना कुशवाहा पिता दया प्रसाद कुशवाहा निवासी वार्ड क्रमांक 27 पुरुषोत्तमपुर, पन्ना, धीरज तिवारी पिता रजनीकान्त तिवारी डायमण्ड चौक, श्रीराम शर्मा पिता रामहित शर्मा निवासी ग्राम हरदुआ, अजय पटेरिया पिता महेश प्रसाद पटेरिया निवासी निवासी बेनीसागर मोहल्ला पन्ना ये सभी भी इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं, जिनके खिलाफ पुलिस ने मामला कायम कर इन सभी की तलाश शुरू कर दी। जिससे अग्रिम जमानत के लिए आरोपियों ने आवेदन किया, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी (पीए) एक्ट पन्ना माननीय न्यायालय ने गंभीर अपराध मानते हुए इनकी अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि प्रकरण में प्रथम दृष्टया गंभीर अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, तथा यह मामला अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के दायरे में आता है, इसलिए धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
क्या है मामला?
मामले के संबंध में बताया जाता है कि फरियादी श्रीमती संतोषरानी आदिवासी के द्वारा था प्रभारी पुलिस थाना कोतवाली पन्ना को इस आशय का लिखित आवेदन पत्र प्रस्तुत किया कि भूमि सर्वे क्रमांक 148/4 रकबा 2.00हे. स्थित मौजा ग्राम मन्नौर, तहसील शाहनगर, थाना रैपुरा, जिला पन्ना की भूमि उसके पिता जगोला गौंड़ के स्वामित्व एवं आधिपत्य की थी। उसके पिता एवं मां मल्लन बाई के कुल दो पुत्रियां एक वह स्वयं (श्रीमती संतोषरानी गौंड़) तथा दूसरी कुसुमबाई गौंड़ हैं, उसके पिता जगोला के अन्य कोई संतान नहीं थी। उसके पिता की मृत्यु बचपन में ही हो चुकी है, पिता की मृत्यु के पश्चात् उसकी मां मल्लनबाई ने दूसरी शादी भग्गू आदिवासी के साथ की थी जिससे उन्हें दो संतान संतूलाल गौंड़ एवं सुकरती बाई पैदा हुयी थी। लगभग 20 साल पहले संतू लाल ने उसके सौतेले पिता भग्गूलाल की हत्या कर दी थी जिसमें उसे आजीवन कारावास की सजा हुयी थी, इस कारण से उसकी मां मल्लनबाई, बहन सुकरती के घर ग्राम ताखौरी में रहने लगी थी, उसकी मां को आंखों से दिखायी नहीं देता था।जगोला के स्वामित्व एवं आधिपत्य की उक्त भूमि की देखरेख उसकी पुत्री फरियादिया श्रीमती संतोषरानी गौंड़ करती थी। उक्त जमींन के संबंध में राजाराम सौर, निवासी जैतपुरा को मृतक जगोला का एकमात्र पुत्र बताकर आरोपीगण श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी तथा रामलखन त्रिपाठी ने राजाराम का जमींन में नामांतरण करा दिया तथा जमींन का विक्रय पत्र अपने नाम से करा लिया एवं जमींन पर कब्जा कर लिया है। इस संबंध में फरियादिया तथा उसकी बहन कुसुमरानी ने वर्ष 2022 में भी कलेक्टर साहब को आवेदन जमींन वापस कराने के संबंध में दिया था जिस संबंध में जांच भी की गयी थी।पीड़िता की शिकायत पर थाना कोतवाली पन्ना में अपराध क्रमांक 0824/2025 अन्तर्गत धारा 420, 120बी, धारा 3(1)(एफ), एससी/एसटी एक्ट के तहत विवेचना में प्राप्त साक्ष्य के आधार पर प्रकरण में धारा 3(2)(वी) एस.सी.एस.टी. एक्ट इजाफा धारा 467, 468, 471, 419, 409, 192, 193, 196, 197, 198, 34 भा.दं.सं. का इजाफा किया गया। इसके साथ ही पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी श्रीकांत दीक्षित को घर से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया साथ ही इसमें लिप्त आरोपी रामलखन त्रिपाठी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया बांकी अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
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